MP की मोहन सरकार आज एक बार फिर भारी-भरकम कर्ज लेने जा रही है। सोमवार को सरकार बाजार से करीब 4,000 करोड़ रुपए का कर्ज उठाएगी। यह राशि तीन हिस्सों में ली जाएगी। 1,500-1,500 करोड़ रुपए के दो और 1,000 करोड़ रुपए का एक लोन। इससे पहले 26 अगस्त को भी सरकार ने 4,800 करोड़ रुपए का कर्ज उठाया था।
योजनाओं के लिए रकम
सरकार का कहना है कि इस कर्ज से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल लाड़ली बहना योजना की किस्तों, सितंबर में होने वाले सेवा पर्व और अलग-अलग बड़ी परियोजनाओं के भुगतान में किया जाएगा। सरकार के मुताबिक योजनाओं को समय पर चलाना जरूरी है, इसलिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना पड़ रहा है।
कर्ज का आंकड़ा चौंकाने वाला
आज के कर्ज के बाद इस वित्त वर्ष में अब तक कुल 31,900 करोड़ रुपए का कर्ज लिया जा चुका होगा। इसके साथ ही राज्य पर कुल बकाया कर्ज बढ़कर ₹4,53,640.27 करोड़ तक पहुंच जाएगा। 31 मार्च 2025 को यह आंकड़ा ₹4,21,740.27 करोड़ था। यानी कुछ ही महीनों में कर्ज में 30,000 करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है।
सरकार का तर्क
विपक्ष अक्सर सरकार पर बढ़ते कर्ज को लेकर निशाना साधता है। हालांकि सरकार का कहना है कि वह लोन की लिमिट के भीतर ही उधारी ले रही है। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष के राजस्व सरप्लस का हवाला दिया है।
वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश को ₹12,487.78 करोड़ का राजस्व अधिशेष था। उस साल सरकार की कुल आमदनी ₹2,34,026.05 करोड़ और खर्च ₹2,21,538.27 करोड़ रहा।
इस साल भी अधिशेष का अनुमान
वित्त वर्ष 2024-25 के संशोधित अनुमान के मुताबिक प्रदेश की कुल आमदनी ₹2,62,009.01 करोड़ और खर्च ₹2,60,983.10 करोड़ रहने का अनुमान है। यानी सरकार को इस साल भी करीब ₹1,025.91 करोड़ का अधिशेष मिलने की उम्मीद है।
