MP के मैहर जिले के रामनगर की कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं के साथ मारपीट के मामले में स्कूल के प्रभारी प्राचार्य संतोष पटेल के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की थी। कलेक्टर मैहर के प्रस्ताव पर संभागायुक्त बीएस जामोद ने 13 नवंबर को प्राचार्य को निलंबित करने का आदेश जारी किया। आदेश की कॉपी कलेक्टर और डीईओ मैहर को भी भेजी गई थी। हालांकि, 13 दिसंबर तक प्राचार्य संतोष पटेल निलंबित नहीं हुए। जांच में पता चला कि संभागायुक्त द्वारा आदेश दबा रखा गया था।
अधिकारियों का कहना है कि यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं थी, बल्कि सुनियोजित साजिश प्रतीत होती है। इस वजह से आरोपी प्राचार्य 45 दिन तक निलंबन के बिना स्कूल में तैनात रहे और उनका आरोप पत्र समय पर जारी नहीं हो सका।
खुली पोल
मामला तब उजागर हुआ जब संभागायुक्त ने निलंबन आदेश की तामीली और प्राचार्य का आरोप पत्र मांगा। इसके बाद डीईओ कार्यालय ने दोबारा आदेश मंगाकर उसे तामीली के लिए बीईओ को सौंपा। इससे साफ हो गया कि आदेश को जानबूझकर रोका गया था ताकि प्राचार्य बहाल हो जाए और उस पर कानूनी कार्रवाई प्रभावित हो।
आरोपी पर दर्ज हैं गंभीर मामले
संतोष पटेल के खिलाफ केवल छात्राओं के साथ मारपीट का मामला ही नहीं है। उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत भी प्रकरण दर्ज हैं, इसके अलावा अन्य गंभीर आरोप भी हैं। ऐसे में निलंबन आदेश का समय पर पालन न होना गंभीर सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन में आदेशों के पालन और जवाबदेही के मामलों में गंभीर कमी है। आदेश रोककर आरोपी को लाभ पहुंचाने की कोशिश ने सिस्टम की साख पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

आगे की कार्रवाई पर निगाह
अब मामला उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के ध्यान में है। उम्मीद है कि प्राचार्य पर कानूनी कार्रवाई जल्द पूरी होगी और भविष्य में ऐसे लापरवाही वाले कदमों पर रोक लगेगी। इस घटना से शिक्षा विभाग और संभागायुक्त कार्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता और बढ़ गई है।
