अगर किसी मरीज की हालत इतनी नाजुक हो कि उसे तुरंत दूसरे शहर या बड़े अस्पताल में शिफ्ट करना जरूरी हो, तो अब किसी नेता या अफसर के दरवाज़े खटखटाने की ज़रूरत नहीं है। MP सरकार ने एयर एंबुलेंस सेवा के लिए बिल्कुल आसान और सीधी प्रक्रिया तय की है। बस आपको अपने जिले के CMHO दफ्तर (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) तक पहुंचना होगा। बाकी सारा काम सिस्टम खुद करेगा।
पहला कदम
सबसे पहले, उस अस्पताल से बात करें जहां डॉक्टरों ने सलाह दी है कि मरीज को एयर एंबुलेंस से शिफ्ट करना जरूरी है। अस्पताल एक अनुमति पत्र (रेफरल लेटर) देगा, जिसमें लिखा होगा कि मरीज को हवाई एंबुलेंस से ले जाना चिकित्सकीय रूप से आवश्यक है।
दूसरा कदम
अब इस अनुमति पत्र को लेकर अपने जिले के CMHO ऑफिस जाएं। वहां अधिकारी मरीज की स्थिति की पुष्टि करेंगे और ये देखेंगे कि मामला वाकई आपातकालीन है या नहीं। अगर सब कुछ सही पाया गया, तो CMHO एयर एंबुलेंस की अनुशंसा करेंगे।
तीसरा कदम
CMHO की रिपोर्ट मिलने के बाद जिला कलेक्टर की स्वीकृति ली जाती है। अगर मरीज को राज्य के भीतर ही किसी शहर में ले जाना है, तो कलेक्टर की अनुमति पर्याप्त होती है।
अगर मरीज को राज्य के बाहर जैसे दिल्ली, मुंबई या चेन्नई किसी बड़े अस्पताल में भेजना हो, तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के संचालक (Director of Health Services) से मंजूरी लेनी होती है। यह प्रक्रिया भी ज्यादा लंबी नहीं है, बस जरूरी कागज़ पूरे हों।
कौन ले सकता है फ्री सेवा?
अगर आपके पास आयुष्मान भारत कार्ड है, तो राज्य के अंदर या बाहर दोनों जगह एयर एंबुलेंस सेवा पूरी तरह मुफ्त है, लेकिन जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उनके लिए थोड़े अलग नियम हैं। राज्य के भीतर सरकारी अस्पतालों तक मुफ्त सेवा दी जाएगी। राज्य के बाहर जाने पर तय सरकारी दरों के हिसाब से शुल्क देना होगा।
