MP में उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसानों को खाद के लिए समितियों और दुकानों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। 1 जनवरी 2026 से ई-विकास प्रणाली लागू कर दी गई है, जिसके तहत खाद वितरण पूरी तरह ई-टोकन आधारित होगा। इस नई व्यवस्था में agristack पर किसान का पंजीयन अनिवार्य किया गया है। भोपाल के बेरखेड़ी कला स्थित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र में ई-विकास प्रणाली को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें भोपाल संभाग के सभी जिलों से कृषि, एमपी एग्रो, विपणन और सहकारिता विभाग के अधिकारी शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान ई-टोकन व्यवस्था की पूरी प्रक्रिया समझाई गई और इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल विदिशा जिले के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किन व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ा और उनका समाधान कैसे निकाला गया। इन अनुभवों के आधार पर अन्य जिलों के अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
समिति और लिमिट से जुड़े नियम
ई-विकास प्रणाली के तहत किसान को उसी समिति से खाद बुक करनी होगी, जिसका वह ड्यू सदस्य है। यदि खरीफ सीजन में खाद की निर्धारित लिमिट पूरी हो चुकी है, तो नकद राशि जमा कर लिमिट खुलवानी होगी। ई-टोकन की वैधता केवल तीन दिन की रहेगी, इसलिए समय पर खाद लेना जरूरी होगा।
घर बैठे ऐसे मिलेगा ई-टोकन
अब किसान etoken.mpkrishi.org पोर्टल पर जाकर आधार कार्ड के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। ओटीपी सत्यापन के बाद agristack से जुड़े भू-अभिलेख के आधार पर रकबा और फसल की जानकारी स्वतः आ जाएगी। खाद की मात्रा की पुष्टि कर समिति या दुकान चुनते ही ई-टोकन जनरेट हो जाएगा। जिन किसानों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है, वे कियोस्क सेंटर के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। इस व्यवस्था से खाद की उपलब्धता की जानकारी पहले ही मिल जाएगी और किसान अपनी पसंद की दुकान या समिति चुन सकेंगे। आधी रात की कतारें अब इतिहास बनेंगी और खाद वितरण पूरी तरह सुव्यवस्थित होगा।
