भोपाल के तुलसी नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क रविवार को मध्यप्रदेश के बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, अंशकालीन भृत्य, राजस्व सर्वेयर, आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारी एक मंच पर जमा हुए। सभी संगठनों ने मिलकर अपने अधिकारों की मांग को “महाक्रांति रैली” नाम दिया।
संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों की साझा आवाज है। उन्होंने सरकार से समान कार्य के लिए समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
न्यूनतम वेतन की समस्या
वासुदेव शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरकारी कामकाज अब ठेकेदारों और आउटसोर्स कंपनियों के हाथ में चला गया है। क्लास 3 और क्लास 4 के पदों पर स्थायी भर्ती लगभग बंद हैं, जबकि बैंक सेवा केंद्र, पंचायत चौकीदार और सीएम राइज स्कूल जैसी जगहों पर आउटसोर्स कर्मियों को तैनात किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पंचायत चौकीदारों को मात्र 3,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है और समय पर भुगतान नहीं होता। मोर्चा की मांग है कि न्यूनतम वेतन ₹21,000 प्रति माह किया जाए।
रामनिवास के संघर्ष की कहानी
रैली में पहुंचे रामनिवास केवट ने बताया कि वे पिछले 25 सालों से पंचायत चौकीदार हैं, लेकिन आज भी उनका वेतन केवल 2,000 रुपए है। बच्चों की पढ़ाई और परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है। कई बार खाने-पीने का संकट भी सामना करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने दी उम्मीद
वासुदेव शर्मा ने बताया कि 19 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्थायी, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों से कम वेतन पर समान कार्य लेना श्रमिक शोषण है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलना संवैधानिक अधिकार है।
लंबे समय से लंबित भर्ती
मोर्चा ने आरोप लगाया कि पिछले 20 सालों से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के नियमित पदों पर भर्ती बंद हैं। विभागीय काम अब अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों से कराया जा रहा है, जिन्हें सम्मानजनक वेतन और भविष्य की सुरक्षा नहीं मिलती।
कर्मचारी नेता शामिल
- रजत शर्मा, अध्यक्ष, बैंक मित्र संगठन
- वीरेंद्र गोस्वामी, अध्यक्ष, राजस्व सर्वेयर संघ
- राजभान रावत, अध्यक्ष, पंचायत चौकीदार संघ
- उमाशंकर पाठक, अध्यक्ष, अंशकालीन कर्मचारी संघ
- मनोज उईके, डॉ. अमित सिंह, शिवेंद्र पांडे
