भोपाल की तत्कालीन सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के कुछ वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे उन माता‑पिता को सुझाव देती दिख रही हैं जिनकी बेटियाँ किसी “विधर्मी” से शादी करना चाहती हैं। वायरल क्लिप में प्रज्ञा कहती दिखती हैं कि अगर बेटी किसी अन्य धर्म के युवक के साथ जाने लगी तो माता‑पिता को उसे रोकना चाहिए और जरूरत पड़े तो “मारपीट” भी करनी चाहिए यह बात वे “भले के लिए” करने की वकालत के रूप में रखती दिखती हैं। प्रज्ञा के ये बयान सार्वजनिक मंच पर फैलते ही विवाद खड़ा कर गए। उनके कड़े अंदाज और हिंसक उक्ति ने कई लोगों में नाराजगी और चिंता पैदा कर दी है।
कांग्रेस ने किया तीखा पलटवार
इसी पर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तीखा रिएक्शन दिया। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने कहा कि ऐसे बयानों से समाज में नफरत फैलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या साध्वी प्रज्ञा उन भाजपा नेताओं‑परिवारों के रिश्तेदारों की टांगें भी तोड़ने जाएँगी जिनकी बहुएँ‑बेटियाँ “विधर्मियों” से शादी कर चुकी हैं। मिश्रा ने यह भी कहा कि ऐसे बयान राजनीतिक अराजकता को बढ़ाते हैं और कानून‑व्यवस्था के लिए चुनौती हैं।
*गोडसे की अनुयायी,राजधानी भोपाल की पूर्व विवादास्पद सांसद रहीं @sadhvipragyag “*दीपपर्व” की नज़दीकियों के बीच हिंदू समाज से अपील कर रही हैं कि यदि “*हमारी बेटियां किसी विधर्मी (मुस्लिम) से शादी करती हैं,पहले समझाइए,यदि वह नहीं मानती है तो उसकी टांगे तोड़ दीजिए क्योंकि जो… pic.twitter.com/tLkSbc5z5L
— KK Mishra (@KKMishraINC) October 19, 2025
कांग्रेस ने आगे पूछा कि जब भोपाल में हाल में सामने आई संवेदनशील घटनाओं पर बात करने की ज़रूरत थी, तब साध्वी प्रज्ञा कहाँ थीं और क्यों चुप थीं—यह भी समझना चाहिए।
समाज और कानून दोनों की जिम्मेदारी
राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच यह बात साफ होनी चाहिए कि किसी को भी किसी की ज़िन्दगी पर हिंसा का अधिकार नहीं है। शादी‑विवाह व्यक्तिगत मामला है और कानून किसी भी तरह की अपहरण‑बलात्कार‑हिंसा को बर्दाश्त नहीं करता। ऐसे वक्तव्य समाज में भय और असुरक्षा पैदा कर सकते हैं, इसलिए नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे शब्दों का इस्तेमाल सोच‑समझकर करें।
कहां जा रहा मामला?
अब यह देखना होगा कि वायरल वीडियो के बाद क्या कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज करायी जाती है या विवाद पर किसी तरह की सियासी नोंक‑झोंक आगे बढ़ती है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयान आम जनता और मीडिया में गरमाए हुए हैं, और यह मुद्दा समाज के लिए संवेदनशील होने की वजह से चर्चा बनाकर बैठा है।
