विदिशा के शासकीय कन्या महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव में बुधवार को प्राचार्य बी.डी. अहिरवार का भाषण चर्चा में आ गया। समारोह के समापन के दौरान प्राचार्य ने छात्राओं को ‘मुग़ल-ए-आज़म’ और ‘उमराव जान’ जैसी फिल्में देखने की सलाह दी। उनका तर्क था कि इन फिल्मों से छात्राओं को इतिहास और कला की जानकारी मिलती है।
प्राचार्य के बयान के तुरंत बाद कॉलेज की पूर्व छात्रा कु. महिमा दुबे ने मंच से आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि तवायफ और मुगल काल की कहानियों वाली फिल्में देखने के बजाय महापुरुषों और वीरांगनाओं पर बनी फिल्में देखना ज्यादा उपयोगी और प्रेरणादायक होगा।
विदिशा महिमा दुबे का दृष्टिकोण
महिमा दुबे ने कहा कि हमें ‘मुग़ल-ए-आज़म’ या ‘उमराव जान’ से नहीं, बल्कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती और रानी पद्मिनी जैसी वीरांगनाओं के जीवन से राष्ट्रधर्म और वीरता सीखनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि छात्राओं की प्रेरणा राष्ट्रनिर्माता और स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी से मिलनी चाहिए।
घटना का वीडियो वायरल
समारोह में हुई इस बहस का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें छात्रा और प्राचार्य के बीच विवाद साफ नजर आ रहा है। वीडियो में महिमा दुबे की स्पष्ट और तर्कपूर्ण बातों ने सोशल मीडिया और छात्र समुदाय में चर्चा का विषय बना दिया है।
इस घटना के बाद मामला कॉलेज की अनुशासन समिति तक पहुँच गया है। समिति अब प्राचार्य के बयान और छात्रा की आपत्ति दोनों पक्षों की जांच कर रही है। समिति के निर्णय के बाद भविष्य में ऐसी अनुचित टिप्पणियों से बचने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
छात्राओं और समाज में प्रतिक्रिया
छात्राओं और शिक्षकों के बीच इस विषय पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखी गई। कुछ ने छात्रा के दृष्टिकोण का समर्थन किया, तो कुछ ने प्राचार्य के दृष्टिकोण को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शिक्षा का हिस्सा माना। समाज और शिक्षा विशेषज्ञ भी इस मामले पर गौर कर रहे हैं कि शिक्षा में प्रेरणा और नैतिक शिक्षा का संतुलन कैसे रखा जाए।
