मैहर जिले के सेवा सहकारी समिति मगरौरा उपार्जन केंद्र-2 में इन दिनों जो हालात हैं, वे सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। यहां वेयरहाउस के भीतर नियमों को दरकिनार कर धान का बड़ा ढेर लगा दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि गोदाम की क्षमता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए बाहर खुले मैदान में भी बड़ी मात्रा में धान जमा किया गया है, जिससे अनाज की गुणवत्ता पर खतरा मंडरा रहा है।
तौल के बाद सीधे डंपिंग
केंद्र पर अपनाई जा रही प्रक्रिया भी पूरी तरह संदेह के घेरे में है। किसानों से धान खरीदने के बाद उसे धर्मकांटे में तौल कराया जाता है और बिना किसी व्यवस्था के सीधे गोदाम में डंप करा दिया जाता है। नियमों के अनुसार धान को पहले बोरियों में भरकर सुरक्षित तरीके से स्टोर किया जाना चाहिए, लेकिन यहां उलटा हो रहा है। बाद में जब समय मिलता है, तब बोरियों में भरने का काम किया जाता है।
गोदाम के बाहर खुले में रखे धान पर मौसम का सीधा असर पड़ रहा है। नमी, बारिश या जानवरों से नुकसान की पूरी आशंका बनी हुई है। किसानों का कहना है कि अगर धान खराब होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। सरकारी खरीद व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही से न सिर्फ किसानों को नुकसान हो सकता है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी बोझ बढ़ेगा।
शिकायत के बाद भी चुप्पी
इस पूरे मामले की शिकायत 16 दिसंबर को संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। बावजूद इसके अब तक न तो वेयरहाउस संचालक पर कोई कार्रवाई हुई है और न ही समिति प्रबंधन से जवाबदेही तय की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे संदेह और गहरा होता जा रहा है। उपार्जन केंद्रों के लिए साफ दिशा-निर्देश हैं कि अनाज का भंडारण वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, ताकि उसकी गुणवत्ता बनी रहे। मगर मगरौरा केंद्र-2 में इन नियमों को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है। न तो गोदाम में उचित जगह प्रबंधन है और न ही बाहर रखे धान की सुरक्षा की कोई व्यवस्था दिखाई देती है।
किसानों में नाराजगी
केंद्र पर धान बेचने पहुंचे किसानों में इस व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे सरकार पर भरोसा कर उपज बेचते हैं, लेकिन यहां की लापरवाही उस भरोसे को तोड़ रही है। किसानों ने मांग की है कि मामले की तत्काल जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अब सवाल यह है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो धान के नुकसान के साथ-साथ पूरे उपार्जन तंत्र की साख पर भी असर पड़ेगा। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह मामले को गंभीरता से लेकर जिम्मेदारों पर जल्द कार्रवाई करेगा।
