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IAS संतोष वर्मा पर कार्रवाई का प्रस्ताव, सरकार का रुख अब भी धुंधला; केंद्र को भेजी फाइल पर उठे सवाल

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Published On: 14 December 2025

ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को कार्रवाई का प्रस्ताव भेज दिया है। इस कदम को सवर्ण और ब्राह्मण समाज के कई संगठनों ने अपनी शुरुआती जीत के रूप में देखा है। प्रशासनिक हलकों में यह प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें सरकार का स्पष्ट रुख सामने नहीं आता।

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 12 दिसंबर को यह प्रस्ताव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजा गया। अपर सचिव फरहीन खान के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा तो की गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सरकार उन्हें सेवा से बर्खास्त करना चाहती है या सिर्फ उनका आईएएस प्रमोशन निरस्त करने का इरादा रखती है।

कार्रवाई का आधार नहीं बताया गया

प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार ने इस प्रस्ताव को अधूरा बताते हुए कहा कि इसमें कार्रवाई के ठोस कारणों का उल्लेख नहीं है। उनके अनुसार, प्रस्ताव में सिर्फ इतना कहा गया है कि विभिन्न सामाजिक संगठनों के ज्ञापन प्राप्त हुए हैं और वर्मा के बयान से सामाजिक तनाव की स्थिति बनी है। लेकिन सेवा नियमों के तहत बर्खास्तगी जैसे बड़े कदम के लिए स्पष्ट आधार और ठोस तथ्य जरूरी होते हैं।

प्रमोशन रद्द या सेवा से बाहर?

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि प्रस्ताव की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि उसमें सरकार का फैसला साफ नहीं झलकता। कहीं प्रमोशन रद्द करने की बात है तो कहीं सीधे बर्खास्तगी का संकेत। जबकि दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग नियमों के तहत आती हैं और इनके लिए प्रमाण व जांच का स्वरूप भी अलग होता है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को स्पष्टीकरण के लिए वापस भी भेज सकती है।

संगठन पूरी तरह संतुष्ट नहीं

मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी सेवा संघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, ब्राह्मण रेजिमेंट सहित कई संगठनों ने प्रस्ताव भेजे जाने को सकारात्मक कदम माना है। लेकिन उनका कहना है कि जब तक अंतिम और ठोस कार्रवाई सामने नहीं आती, तब तक आंदोलन को खत्म करना जल्दबाजी होगी।

आगे भी जारी रहेगा दबाव

संगठनों का साफ कहना है कि प्रस्ताव भेजना सिर्फ पहली सफलता है, अंतिम मंजिल नहीं। यदि केंद्र स्तर पर कोई नरमी दिखाई गई या फैसला टलता है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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