सतना जिले के पांच और मैहर जिले के तीन विकास खंडों में खाद, बीज और कृषि दवाओं की आपूर्ति को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विभाग द्वारा इन दोनों जिलों में पंजीकृत थोक और फुटकर विक्रेताओं का मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक स्टॉक रजिस्टर तथा क्रय-विक्रय विवरण की नियमित जांच होती है या नहीं इस पर अब सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय किसानों और कुछ सामाजिक संगठनों ने विभाग से वर्ष 2020 से 2025 तक की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इन दस्तावेज़ों की सुनियोजित समीक्षा कराई जाए, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि खाद-बीज-दवा नियंत्रण प्रणाली में किस स्तर पर गड़बड़ियां की गईं और किसके संरक्षण में यह संभव हुआ।
सबसे ज्यादा शिकायतें
सबसे गंभीर आरोप सोहावल विकासखंड से जुड़े हैं। यहां कार्यरत राजललन बागरी पर किसानों से लेकर थोक और फुटकर विक्रेताओं तक—सभी से अनुचित लाभ लेने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। कई किसान संगठनों ने दावा किया है कि शिकायतें देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। कुछ स्थानीय अखबारों ने भी इन अनियमितताओं को लेकर रिपोर्टें प्रकाशित कर प्रशासन को सतर्क किया था, लेकिन विभागीय स्तर पर स्थिति जस की तस बताई जाती है।
राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सवाल
राजललन बागरी के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उनका संबंध राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के रिश्तेदारों में आता है। इस दावे ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी के साथ यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि उनके एक रिश्तेदार को उत्तर प्रदेश के नरैनी क्षेत्र में गांजा तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन यह विषय भी अभी केवल आरोपों तक सीमित है।
जांच की जरूरत पर जोर
किसान संगठनों का मानना है कि यदि खाद-बीज-दवाई नियंत्रण से संबंधित अधिकारियों के कामकाज की स्वतंत्र जांच कराई जाए, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि अनियमितताएँ कैसे पनपीं और किस तरह की मिलीभगत सामने आ सकती है। सतना और मैहर दोनों जिलों में किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि विभाग 2020 से 2025 तक के स्टॉक रजिस्टर, अनुमतियों, निरीक्षण रिपोर्टों और विक्रेता पंजी का विस्तृत ऑडिट कराए, ताकि स्थिति साफ हो सके।
