सतना जिले का कोलगंवा थाना एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से यह थाना एक ही समुदाय के निरीक्षकों की कमान में रहने के कारण चर्चाओं में रहा है। सूत्र बताते हैं कि कभी यहां सुदीप सोनी रहे, तो कभी उनके ही परिजन मनोज सोनी ने कमान संभाली। थाने की यह परंपरा अब “सोनी युग” के नाम से जानी जाने लगी है, जहां खाकी के भीतर भाईचारे की लकीरें दिखाई देती हैं।
रहस्यमयी डोली
अब इलाके में एक नया नाम तेजी से फैल रहा है “डोली”। सूत्रों के मुताबिक, यह व्यक्ति (या महिला) कोरेक्स और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से जुड़ा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि किसी को यह तक नहीं मालूम कि यह “डोली” आखिर महिला है या पुरुष।
सूत्रों का दावा है कि डोली का कारोबार गहरा नाला क्षेत्र में फैला हुआ है और स्थानीय पुलिस से इसके रिश्ते बेहद गहरे बताए जाते हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि क्षेत्र की कोई भी खाकी ऐसी नहीं जो “डोली की दुकान” पर सलाम ठोककर न निकले।
दुकान पर सन्नाटा
सूत्रों के मुताबिक, मल्होत्रा बिल्डकॉन के बगल में भी एक “डोली” नाम का कारोबार चल रहा है। वहां से नशे की गोलियों और कोरेक्स की बोतलों का खेल जारी बताया जा रहा है। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि यह सब थाने के संरक्षण में संभव हो रहा है।
जहां कार्रवाई की जरूरत है, वहां पुलिस की खामोशी है। वहीं दूसरी ओर, छोटे दुकानदारों और राहगीरों की स्कूटी की डिग्गियां और जेबें टटोली जा रही हैं।
सतना पुलिस पर तंज
स्थानीय लोगों का कहना है कि सतना की पुलिस अब “न्याय और दिखावे” की दोहरी भूमिका निभा रही है। जहां असली अपराधी फल-फूल रहे हैं, वहां पुलिस का डंडा निष्क्रिय है। एक वरिष्ठ नागरिक ने व्यंग्य में कहा, “यहां कहावत उलटी हो गई है। न सांप मर रहा, न लाठी बच रही। दोनों टूट रहे हैं और नुकसान जनता का हो रहा है।”
आईजी पर भी सवाल
जानकारों का मानना है कि इन घटनाओं से आईजी गौरव राजपूत जैसे ईमानदार अधिकारियों की साख पर भी धूल जम रही है। जबकि कोरेक्स तस्करी के वीडियो वायरल हो रहे हैं, वहीं स्थानीय पुलिस कागजी कार्रवाई में व्यस्त दिख रही है।
लोगों का कहना है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो “स्मार्ट सिटी सतना” की यह कहानी प्रशासनिक शर्मिंदगी का प्रतीक बन सकती है।
