राजस्थान में फिर से पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘The सूत्र’ के दो पत्रकारों, हरीश दिवेकर और आनंद पांडे को राजस्थान पुलिस ने मध्यप्रदेश से हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई राज्य की डिप्टी सीएम दीया कुमारी से जुड़ी खबरों को लेकर की गई है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों पत्रकारों को इंदौर से राजस्थान पुलिस की टीम ने गिरफ्तार किए। पिछले कुछ दिनों में The सूत्र ने दीया कुमारी से संबंधित कई रिपोर्टें प्रकाशित की थीं। कथित तौर पर ये रिपोर्टें राज्य के सत्ताधारी दल के नेताओं को पसंद नहीं आईं। इस घटना ने पत्रकारिता जगत में हलचल मचा दी है और कई वरिष्ठ पत्रकार इसे लोकतंत्र और स्वतंत्र मीडिया पर हमला बता रहे हैं।
हुआ विरोध
मीडिया और पत्रकार संगठन इस कार्रवाई को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि राजस्थान सरकार आलोचना सहने के लिए तैयार नहीं है। लगातार स्वतंत्र पत्रकारों पर दबाव बनाने की कोशिशें बढ़ रही हैं। इससे न केवल प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में है, बल्कि आम जनता तक सही जानकारी पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है।
अभी तक राजस्थान पुलिस और राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, पत्रकार संगठनों ने दोनों पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग की है। उनका कहना है कि खबर लिखना अपराध नहीं है। सत्ता से सवाल करना पत्रकारिता का धर्म है। ऐसे दबाव लोकतंत्र के लिए खतरा हैं।
मीडिया पर रखी जा रही नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मीडिया और ऑनलाइन रिपोर्टिंग पर लगातार इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता दोनों पर सवाल खड़े करती है। उनका मानना है कि पत्रकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए तथ्यात्मक खबरें प्रकाशित करते हैं, सरकार का काम उन्हें सुरक्षित वातावरण में काम करने देना होना चाहिए।
इस कार्रवाई ने राजस्थान की वर्तमान सरकार की आलोचना को और हवा दी है। विपक्षी दलों और पत्रकार संगठनों ने इसे सत्ता द्वारा मीडिया पर नजर रखने और आलोचना दबाने की कोशिश बताया है। ऐसे मामलों से न केवल पत्रकारिता की आज़ादी पर असर पड़ता है, बल्कि आम जनता में भी सूचना तक पहुंच में बाधा आती है।
