MP राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देश पर राजधानी भोपाल में हाइब्रिड मोड मेडिएशन ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत एक दिवसीय रोल-प्ले सेशन आयोजित किया गया। यह सत्र होटल पलाश रेजिडेंसी, टीटी नगर में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने किया। न्यायालयों में बढ़ते कार्यभार और समय की कमी को देखते हुए इस प्रशिक्षण संरचना को पहली बार हाइब्रिड मोड में तैयार किया गया है, जो न्यायिक अधिकारियों के लिए एक नई कार्यप्रणाली का रास्ता खोलती है।
इस विशेष प्रशिक्षण में राज्य के 18 जिलों से पहुंचे न्यायिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, तहसील विधिक सेवा समितियों के अध्यक्ष, जिला न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिव शामिल थे। बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को महत्व दिया और यह संकेत भी दिया कि न्यायिक प्रणाली मध्यस्थता को तेजी से अपनाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
मध्यस्थता के तकनीकी
कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुनीत अग्रवाल ने किया। सेशन में मास्टर ट्रेनर्स के रूप में दिल्ली से अनुजा सक्सेना और जबलपुर से शाहिद उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को वास्तविक मामलों पर आधारित रोल-प्ले के माध्यम से मध्यस्थता की बारीकियां सिखाईं, कैसे विवाद में मौजूद तनाव को कम करना है, कैसे दोनों पक्षों को संवाद के लिए सहज बनाना है, और किस तरह निष्पक्षता बनाए रखते हुए समाधान निकालना है।
उनका कहना था कि मध्यस्थता सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संचार, धैर्य और समझ की एक कला है, जिसे सीखकर न्यायिक अधिकारी कोर्ट में लंबित मामलात को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हाइब्रिड मोड प्रशिक्षण
पहले मध्यस्थता का 40 घंटे का प्रशिक्षण पूरी तरह भौतिक उपस्थिति में आयोजित होता था और पांच दिनों तक चलता था। इस बार पहली बार प्रशिक्षण को हाइब्रिड मोड में लागू किया गया। कुछ सत्र ऑनलाइन और कुछ ऑफलाइन। न्यायालयों में बढ़ते कार्यभार और अधिकारियों की सीमित उपलब्धता को देखते हुए यह फॉर्मेट अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस नए मॉडल से समय की बचत होगी, साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी। मध्यस्थता की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए इस तरह के तकनीकी बदलाव भविष्य में भी न्यायिक ढांचे का अभिन्न हिस्सा बन सकते हैं।
महत्वपूर्ण कदम
इस आयोजन ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश की न्यायिक प्रणाली विवाद समाधान के आधुनिक तरीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। मध्यस्थता को सशक्त बनाना न केवल अदालतों का बोझ कम करेगा, बल्कि नागरिकों को तेज और सहज न्याय मिलने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
