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भोपाल नगर निगम की बैठक में हंगामा, नवाब को गद्दार कहने पर बवाल; कमिश्नर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग

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Published On: 24 July 2025

भोपाल | राजधानी भोपाल नगर निगम की बैठक में गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। बीजेपी पार्षद विलासराव गाड़गे ने निगमायुक्त हरेंद्र नारायण पर काम में लापरवाही और जूनियर कर्मचारियों से भेदभाव के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग कर दी। गाड़गे इतना नाराज़ हुए कि स्पीकर की कुर्सी के सामने ही ज़मीन पर बैठकर विरोध जताने लगे।

बैठक की शुरुआत “वंदे मातरम्” गीत से हुई और जैसे ही यह घोषणा हुई कि भोपाल ने स्वच्छता रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल किया है, सदन तालियों से गूंज उठा।

किया गया बीचबचाव

मामले को बढ़ता देख एमआईसी सदस्य जगदीश यादव बीच में आए और निगमायुक्त का बचाव किया। उन्होंने कहा कि हरेंद्र नारायण की वजह से ही भोपाल देशभर में स्वच्छता रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल कर पाया है। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी समेत कई कांग्रेस पार्षद भी कमिश्नर के समर्थन में खड़े हो गए। माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने किसी तरह गाड़गे को समझा-बुझाकर शांत कराया और इसके बाद प्रश्नकाल शुरू हुआ।

इन बातों पर गौर

इस बैठक में नाम बदलने से जुड़े कई प्रस्ताव भी पारित किए गए। पुराने अशोका गार्डन का नाम अब “राम बाग” किया जाएगा, जबकि 80 फीट रोड पर विवेकानंद चौराहा अब “विवेकानंद चौक” कहलाएगा। ये प्रस्ताव बीजेपी पार्षद सूर्यकांत गुप्ता की ओर से लाए गए थे। उनका कहना था कि लोग पहले से इस बदलाव की मांग कर रहे थे ताकि लोकेशन पहचानने में आसानी हो।

कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह नाम सम्राट अशोक के नाम पर पड़ा था और इसे बदलने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह विकास छोड़ नाम बदलने की राजनीति कर रही है। इसके बावजूद प्रस्ताव बहुमत से पास हो गया।

ऐसे बढ़ा हंगामा

हंगामा तब और बढ़ गया जब बीजेपी पार्षद देवेंद्र भार्गव ने हमीदिया अस्पताल, कॉलेज और स्कूल का नाम बदलने का प्रस्ताव पास करा लिया। कांग्रेस पार्षद भड़क उठे। इस दौरान सदन में ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारे गूंजने लगे। दोनों दलों के पार्षद आमने-सामने आ गए। आरोप है कि एक कांग्रेस पार्षद ने बीजेपी पार्षदों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसी दौरान स्पीकर किशन सूर्यवंशी ने कह दिया, “भोपाल का नवाब पहले भी गद्दार था, आज भी है और आगे भी रहेगा।” इस बयान से सदन में बवाल मच गया और कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

सफाईकर्मियों को कराया भोज

बैठक के दौरान महापौर मालती राय ने घोषणा की कि स्वच्छता सर्वेक्षण में दूसरा स्थान मिलने की खुशी में 8,000 सफाईकर्मियों को भोज कराया जाएगा। रक्षाबंधन पर उनके स्वास्थ्य परीक्षण होंगे, उन्हें रेनकोट, राखी और यूनिफॉर्म दी जाएगी। साथ ही, 1,000 संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने की प्रक्रिया 60 दिन के भीतर पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ठेके की प्रक्रिया को सरल किया जाएगा, ताकि निर्माण कार्यों में देरी न हो।

किए गए ये ऐलान

  • महापौर ने यह भी ऐलान किया कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का वेतन रक्षाबंधन से पहले संभवत: 5 अगस्त तक दे दिया जाएगा। यदि नियमों की अनुमति मिलती है, तो पार्षदों के मानदेय में भी वृद्धि की जा सकती है। बैठक में भावनात्मक क्षण भी देखने को मिले, जब पार्षद गीता प्रसाद माली ने पूर्व विधायक और भाजपा नेता रमेश शर्मा ‘गुट्टू भैया’ के नाम पर 80 फीट रोड का नाम रखने का प्रस्ताव रखा। उनकी बेटी और पार्षद प्रियंका मिश्रा भावुक हो गईं और हमीदिया कॉलेज का नाम भी उनके पिता के नाम पर रखने की मांग की।
  • सदन ने छह नए विसर्जन कुंडों के निर्माण का प्रस्ताव भी पास किया, जिन पर ₹25 करोड़ खर्च किए जाएंगे। ये कुंड कोलार, समर्धा, बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी और प्रेमपुरा जैसे इलाकों में बनाए जाएंगे। बैठक के दौरान नगर निगम भवन में बारिश का पानी टपकता रहा, जिस पर अध्यक्ष सूर्यवंशी ने जल्द ही मरम्मत कराने की बात कही।
  • कांग्रेस ने इस बैठक में निगम प्रशासन पर नाम बदलने की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि नालियां, सड़कें और जलभराव जैसे मुद्दे दरकिनार किए जा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने चेतावनी दी कि अगर बजट में पारदर्शिता नहीं आई तो वह अदालत का रुख करेंगी।
  • कांग्रेस पार्षद अज़ीज़ुद्दीन ने वीआईपी रोड फूड प्लाज़ा के निर्माण पर सवाल उठाए और झील की कैचमेंट एरिया में हो रहे निर्माण को लेकर जांच समिति की चुप्पी पर नाराज़गी जताई। एमआईसी सदस्यों ने बताया कि नोटिस और चालान जारी किए गए हैं, लेकिन विपक्ष ने कार्रवाई को नाकाफी बताया।
  • बैठक में मांस विक्रेताओं की दुकानों, अवैध निर्माण, संपत्ति कर की गणना, अमृत योजना, टेंडर प्रक्रिया और निगम के कंप्यूटर ऑपरेटरों की संख्या जैसे कई मुद्दों पर सवाल उठे। महाशिवरात्रि पर मांस की दुकानें बंद न करने पर भी सवाल खड़े हुए। महापौर और एमआईसी सदस्यों ने सभी सवालों के जवाब दिए और कहा कि सभी कार्य नियमानुसार हो रहे हैं।
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