सागर के नन्हे शतरंज खिलाड़ी सर्वज्ञ सिंह कुशवाहा ने मात्र 3 साल 7 महीने 20 दिन की उम्र में आधिकारिक फिडे रेटिंग हासिल कर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसकी चर्चा देश-विदेश में हो रही है। इससे पहले यह उपलब्धि कोलकाता के अनीष सरकार के पास थी, जिन्होंने 3 साल 8 महीने 19 दिन में यह खिताब पाया था। सर्वज्ञ ने यह रिकॉर्ड तोड़कर खुद को दुनिया के सबसे कम उम्र के रेटेड चेस प्लेयर के रूप में स्थापित कर दिया है।
जैसे ही सर्वज्ञ का नाम सुर्खियों में आया, वैसे ही इस उपलब्धि पर सवाल भी उठने लगे। फिडे के पास एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कोचों ने फिडे के फेयर प्ले नियमों का उल्लंघन किया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिन तीन खिलाड़ियों को सर्वज्ञ ने हराकर रेटिंग हासिल की, वे उसी चेस अकादमी से जुड़े कोच थे, जहां सर्वज्ञ प्रशिक्षण लेता है।
नियत नहीं है ठीक
इन आरोपों पर सर्वज्ञ के पिता सिद्धार्थ कुशवाहा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि कुछ लोग जान-बूझकर बच्चे की उपलब्धि पर सवाल उठाकर उसका नाम खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शतरंज लाइव खेला जाता है, सबकी निगरानी में होता है। कोई भी गलतफहमी है तो जांच करा लें, हम तैयार हैं। सिद्धार्थ के अनुसार, शिकायत करने वाले अपना नाम तक उजागर नहीं कर रहे, इससे साफ है कि उनकी नीयत ठीक नहीं है।
उम्र से आगे चल रहा सर्वज्ञ का खेल
सर्वज्ञ अभी नर्सरी में पढ़ता है, लेकिन शतरंज की उसकी समझ और एकाग्रता उसकी उम्र से कई गुना आगे है। उसके पिता बताते हैं कि बच्चे ने सिर्फ एक हफ्ते में सभी मोहरों के नाम और चालें याद कर लीं। उसकी रैपिड फिडे रेटिंग 1572 है, जो इतनी कम उम्र में बेहद असाधारण मानी जाती है।
बनाया रिकॉर्ड
फिडे नियमों के मुताबिक, रेटिंग पाने के लिए कम से कम एक अंतरराष्ट्रीय रेटेड खिलाड़ी को हराना जरूरी होता है। लेकिन सर्वज्ञ ने एक नहीं, तीन खिलाड़ियों को पराजित किया। मंगलुरु के 24वें आरसीसी इंटरनेशनल रैपिड कप में उन्होंने 22 वर्षीय अभिजीत अवस्थी (रेटिंग 1542) को हराया। खंडवा के धूनीवाले ओपन में 29 वर्षीय शुभम चौरसिया (रेटिंग 1559) को मात दी। इंदौर के डॉ. अजीत कसलीवाल ओपन रैपिड में 20 वर्षीय योगेश नामदेव (रेटिंग 1696) को पराजित किया इसके बाद छिंदवाड़ा के एक टूर्नामेंट में अभिजीत अवस्थी को फिर हराकर अपनी क्षमता साबित की।
फिडे की जांच पर टिकीं निगाहें
शिकायत दर्ज होने के बाद अब फिडे इस पूरे मामले की जांच करेगा। सर्वज्ञ के समर्थकों का मानना है कि एक नन्हे खिलाड़ी की प्रतिभा को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं शिकायतकर्ता फेयर प्ले के सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। जो भी हो, इतना तो तय है कि सर्वज्ञ ने कम उम्र में ऐसा अध्याय खोला है, जिसे शतरंज इतिहास लंबे समय तक याद रखेगा।
