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सतना कोर्ट का कड़ा रुख, महिला को अंधा करने वाले दोषी को 10 साल की सश्रम कैद

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Published On: 20 December 2025

सतना की अदालत ने एक जघन्य और अमानवीय हमले के मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सतना ने महिला की आंख पर लाठी से वार कर उसे जीवनभर के लिए अंधा बनाने वाले आरोपी को दोषी मानते हुए 10 वर्ष की सश्रम कैद की सजा सुनाई है।

दोषी करार दिया गया व्यक्ति प्रदीप कुमार साकेत उर्फ दादू है, जिसकी उम्र करीब 32 वर्ष बताई गई है। वह ग्राम लखनवाह, थाना कोटर, जिला सतना का रहने वाला है। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता के तहत गंभीर चोट पहुंचाने के अपराध में दोषी ठहराया।

घटना का विवरण

मामला उस समय सामने आया जब फरियादी रामपती चौधरी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने उनकी पत्नी रामरती चौधरी पर लाठी से हमला किया। हमले के दौरान आरोपी ने सीधे महिला की आंख को निशाना बनाया। यह वार इतना गंभीर था कि पीड़िता की आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई और वह स्थायी रूप से अंधी हो गई। अदालत के समक्ष पेश मेडिकल रिपोर्ट में साफ तौर पर पुष्टि हुई कि पीड़िता की आंख को अपूरणीय क्षति पहुंची है। डॉक्टरों ने इसे स्थायी अंधता बताया। मेडिकल साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के मामले को और मजबूत कर दिया।

सबूतों की अहम भूमिका

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शी गवाहों को अदालत में पेश किया। गवाहों के बयानों में आपसी सामंजस्य पाया गया। साथ ही पुलिस द्वारा जुटाए गए भौतिक साक्ष्य और दस्तावेज भी आरोपी के खिलाफ गए। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का कृत्य न केवल पीड़िता के शरीर पर हमला है, बल्कि उसके पूरे जीवन को अंधकार में धकेलने जैसा है। अदालत ने माना कि यह अपराध अत्यंत क्रूर और अमानवीय है, जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।

सभी तथ्यों, गवाहों और मेडिकल प्रमाणों के आधार पर अदालत ने प्रदीप कुमार साकेत को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही यह भी कहा गया कि इस तरह के फैसले समाज में अपराधियों के लिए चेतावनी का काम करेंगे।

पीड़िता को न्याय की उम्मीद

इस फैसले को महिला अधिकारों और न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रही पीड़िता और उसके परिवार को अदालत के इस फैसले से कुछ हद तक राहत और संतोष मिला है।

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