सतना में गोदावरी माइंस को लेकर उठी कार्रवाई की मांग अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। आरोप है कि माइंस संचालक इतने प्रभावशाली हो चुके हैं कि वे सरकारी निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे। ट्रेनी IAS अधिकारी द्वारा जारी जांच के आदेश को भी विभागीय टीमें अब तक पूरा नहीं कर सकी हैं, जिससे सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।कुछ दिन पहले एसडीएम ने राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम गठित की थी। टीम को निर्देश दिया गया था कि खामाखोहिया (सेलौरा) क्षेत्र में बक्साइट के अवैध उत्खनन के आरोपों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो टीम मौके पर पहुंची और न ही कोई रिपोर्ट जमा हुई। यह सुस्ती विभाग के इरादों पर सवाल खड़े कर रही है।
माइंस संचालकों के बड़े दावे
सूत्रों की मानें तो गोदावरी माइंस से जुड़े दो नाम प्रसन्न मूर्ति मिश्रा और आर. डी. चौधरी पूरे मामले के केंद्र में बताए जा रहे हैं। आरोप है कि दोनों अपने प्रभाव का इतना जोर दिखा रहे हैं कि खुले तौर पर दावा करते घूम रहे हैं कि न तो ट्रेनी IAS अधिकारी और न ही जिला कलेक्टर उनका कुछ बिगाड़ सकते हैं। यह दावा जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
जांच में हो रही देरी को लेकर प्रशासनिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ अधिकारी मानते हैं कि विभाग के कुछ लोग माइंस संचालकों से मिलकर काम कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि दबाव इतना ज्यादा है कि कोई अधिकारी इस मामले को हाथ लगाने से हिचक रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या जिले के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेंगे या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। स्थानीय लोग और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं की गई तो अवैध खनन के चलते न सिर्फ सरकारी नुकसान बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर खतरा होगा। अगले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि प्रशासन दबाव में झुकता है या कानून के अनुसार सख्त कदम उठाता है। फिलहाल, जिले में इस मुद्दे को लेकर तनाव और असमंजस दोनों ही बने हुए हैं।
