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सतना HIV कांड: जांच रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की परतें, सिस्टम फेल होने पर उठे गंभीर सवाल

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Published On: 3 January 2026

सतना के बहुचर्चित HIV कांड को लेकर गठित जांच टीम की रिपोर्ट सामने आते ही स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट में साफ तौर पर माना गया है कि पूरा सरकारी सिस्टम इस मामले में बुरी तरह फेल रहा। जांच में यह बात उभरकर आई है कि ब्लड बैंक से लेकर निगरानी तंत्र तक हर स्तर पर नियमों की अनदेखी और मनमानी चल रही थी, जिसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ा। जांच टीम ने यह भी स्वीकार किया है कि जिन डोनरों से संक्रमित खून लिया गया, उनकी अब पहचान लगभग असंभव हो चुकी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिकॉर्ड संधारण और ट्रैकिंग सिस्टम की भारी लापरवाही के चलते यह पता नहीं लगाया जा सकता कि HIV वायरस फैलाने वाला खून किस डोनर का था। यह स्वीकारोक्ति अपने आप में सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता मानी जा रही है।

संक्रमण फैलाने वाले अब भी आज़ाद

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पूरी कवायद और जांच के बावजूद HIV संक्रमण फैलाने वाले डोनर अब भी खुले घूम रहे हैं। रिपोर्ट में माना गया है कि समय रहते कार्रवाई और पहचान नहीं होने से संक्रमण का खतरा खत्म नहीं हुआ है। यह स्थिति न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाती है। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में ब्लड बैंक जांच प्रणाली में बड़े नीतिगत बदलाव की अनुशंसा की है। टीम का कहना है कि मौजूदा जांच पद्धति अपर्याप्त है और उसमें आधुनिक तकनीक को शामिल करना जरूरी है। खास तौर पर ब्लड सैंपल की जांच को और अधिक सख्त, पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने पर जोर दिया गया है।

NAT मशीन की जरूरत

रिपोर्ट में साफ तौर पर ब्लड बैंक में एंटीजन जांच को अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही NAT मशीन लगाने की जरूरत बताई गई है, जिससे शुरुआती स्तर पर ही HIV जैसे संक्रमण की पहचान की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था पहले से होती, तो शायद यह कांड टल सकता था। रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब सरकारी सिस्टम की नाकामी पर लीपापोती शुरू होने के आरोप भी लगने लगे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। वहीं, पूरे मामले पर स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी भी कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही है।

भरोसे की टूटती डोर

सतना HIV कांड की रिपोर्ट ने आम लोगों के मन में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भरोसा कमजोर कर दिया है। मासूम बच्चों के संक्रमित होने की यह त्रासदी सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि चेतावनी है कि अगर सुधार नहीं हुआ तो ऐसे मामले दोहराए जा सकते हैं। अब देखना होगा कि सिफारिशें कागजों तक सीमित रहती हैं या वास्तव में व्यवस्था में बदलाव होता है।

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