सतना स्मार्ट सिटी के नाम पर हो रहे विकास कार्यों में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। वेंकट स्कूल क्रमांक-2 के पीछे स्थित कॉलेज रोड पर सड़क के बीचों-बीच खड़े बिजली के खंभे लोगों के लिए कौतूहल और खतरे, दोनों का कारण बन गए हैं। जिस सड़क को सुगम और सुरक्षित यातायात के लिए तैयार किया गया था, वही अब रोजमर्रा की परेशानी का सबब बनती नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के बीच खड़े ये खंभे किसी भी एंगल से सामान्य नहीं लगते। वाहन चालक जब तेज रफ्तार में आते हैं, तो अचानक सामने उभरे खंभे उन्हें झटका दे देते हैं। कई लोग इसे मजाक में ‘नेचुरल स्पीड ब्रेकर’ कह रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह स्थिति गंभीर दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है।
सतना स्मार्ट सिटी
कॉलेज रोड होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और स्थानीय लोग आवागमन करते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवार छात्रों के लिए यह रास्ता जोखिम भरा बन गया है। रात के समय या बारिश में जब सड़क पर पानी भर जाता है, तब ये खंभे साफ दिखाई नहीं देते और हादसे की आशंका और बढ़ जाती है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर स्मार्ट सिटी परियोजना में ऐसी योजना कैसे पास हो गई, जिसमें सड़क के बीच खंभे खड़े रह गए। क्या सड़क निर्माण से पहले बिजली विभाग और स्मार्ट सिटी प्रबंधन के बीच समन्वय नहीं हुआ? नागरिकों का कहना है कि अगर यही स्मार्ट प्लानिंग है, तो आम जनता की सुरक्षा किस भरोसे छोड़ी गई है।
व्यंग्य में गुस्सा
हालांकि सोशल मीडिया और चाय की दुकानों पर लोग इस ‘खंभा इंजीनियरिंग’ पर व्यंग्य कर रहे हैं, लेकिन उनके भीतर का गुस्सा साफ झलकता है। लोग कह रहे हैं कि अगर समय रहते खंभों को हटाया या शिफ्ट नहीं किया गया, तो कोई बड़ा हादसा होना तय है। व्यंग्य के पीछे असल मांग यही है कि सड़क को वास्तव में सुरक्षित बनाया जाए।
स्थानीय नागरिकों और छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि कॉलेज रोड का तत्काल निरीक्षण कर इन खंभों को हटाया जाए या सड़क का डिज़ाइन बदला जाए। स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ दिखावटी विकास नहीं, बल्कि सुरक्षित और समझदारी भरा इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘स्मार्ट समस्या’ को कितनी जल्दी समझकर समाधान निकालता है।
