मध्यप्रदेश की राजनीति में शाजापुर से उभरे एक बयान ने फिर हलचल पैदा कर दी है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को कहा, “हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं, अपने बहनों के गांव में पानी तक नहीं पीते। मेरे पिताजी घर से पानी का लोटा लेकर चलते थे, लेकिन आज के प्रतिपक्ष ऐसे हैं जो अपनी जवान बहन को बीच चौराहे पर चुंबन करते हैं।” उनके इस बयान के बाद कांग्रेस नेता और अन्य विपक्षी दल सक्रिय हो गए।
विजयवर्गीय की सफाई
इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद विजयवर्गीय ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी रिश्ते की पवित्रता पर प्रश्न उठाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया, “भाई-बहन और पिता-बेटी के पवित्र रिश्ते की मर्यादा की बात की है, बाकी संबंध प्रेम के हैं। मैंने भारतीय और विदेशी संस्कृति के अंतर पर ध्यान दिलाने की कोशिश की। मेरा पूरा भाषण सुन लिया जाता, तो यह विवाद नहीं खड़ा होता। भाषण का केवल एक टुकड़ा उठाकर पेश करना उचित नहीं है।”
कांग्रेस का विरोध
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने इस बयान पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, “इस तरह की टिप्पणी भारत की संस्कृति और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को चुनौती देती है। इसके लिए कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा होना चाहिए। यह पगलाहट है और उन्हें माता रानी सदबुद्धि दें।” महिला कांग्रेस ने भी इस मामले में भोपाल में प्रदर्शन की योजना बनाई है।
कैलाश विजयवर्गीय ने भाई-बहन जैसे पवित्र रिश्ते पर घटिया टिप्पणी कर अपनी घृणित और संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया है! pic.twitter.com/bDpC1i6mj6
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) September 26, 2025
राजनीतिक हलचल
बयान के बाद मध्यप्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। कांग्रेस इसे भाजपा और विजयवर्गीय की संस्कृति विरोधी टिप्पणी मान रही है, वहीं भाजपा नेता पलटवार कर इसे केवल भारतीय संस्कार और मर्यादा के दृष्टिकोण से देख रहे हैं। इस बहस ने राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। शाजापुर बयान विवाद ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। जहाँ एक तरफ विपक्ष इसे अनुचित और विवादित मान रहा है, वहीं भाजपा इसे संस्कृति और परंपरा के नजरिए से सही ठहरा रही है। अब इस मामले में भविष्य में और भी बयानबाजी और राजनीतिक हलचल की संभावना बनी हुई है।
