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12 से 14 अक्टूबर तक चलेगा MP में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का विशेष चरण, 18 जिलों में गूंजेगा नारा

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Published On: 11 October 2025

मध्य प्रदेश में एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। 12 से 14 अक्टूबर 2025 तक MP के 18 जिलों में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का अतिरिक्त चरण चलाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य एक भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रहे है।

अभियान के तहत 39.19 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राज्य भर में 64 हजार वैक्सीनेटर्स और हजारों स्वास्थ्यकर्मी जुटाए गए हैं।

उप मुख्यमंत्री का आह्वान

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इस विशेष चरण की घोषणा करते हुए कहा कि भारत का “पोलियो मुक्त” दर्जा हमारी जागरूकता और एकजुटता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि हमने पोलियो को हराया जरूर है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। हमारे पड़ोसी देशों में अब भी पोलियो के मामले मिल रहे हैं, इसलिए हमें सतर्क रहना होगा। हर परिवार को आगे बढ़कर इस अभियान में भाग लेना चाहिए। शुक्ल ने जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस मिशन को सफल बनाने की सक्रिय भागीदारी की अपील की।

कैसे चलेगा अभियान

  • 24 हजार बूथ और 7 हजार टीमें तैयार
  • स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए व्यापक तैयारी की है।
  • पहले दिन (पोलियो रविवार) को प्रदेश भर में 24 हजार पोलियो बूथ स्थापित किए जाएंगे।
  • 7 हजार से अधिक टीमें घर-घर जाकर बच्चों को खुराक पिलाने का कार्य शुरू करेंगी।
  • अगले दो दिनों में 31 हजार मोबाइल टीमें उन घरों तक पहुंचेंगी, जहां बच्चे छूट गए होंगे।
  • इसके अलावा, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 1400 ट्रांजिट बूथ भी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मेला स्थलों पर लगाए जा रहे हैं।

विशेष फोकस

अभियान में ऐसे क्षेत्रों को भी ध्यान में रखा गया है, जहां पोलियो के संक्रमण की आशंका अधिक रहती है, जैसे ईंट भट्टे, क्रेशर स्थल, झुग्गी बस्तियां, स्लम, वनग्राम और निर्माणाधीन क्षेत्र। इन इलाकों में 500 मोबाइल टीमें लगातार भ्रमण करेंगी ताकि कोई भी बच्चा दवा से वंचित न रह जाए।

जनजागरूकता है सबसे बड़ा टीका

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि पोलियो से बचाव की सबसे मजबूत दीवार है जनजागरूकता और सहभागिता। डॉ. भगवती श्रीवास (मो. 9993178214) ने बताया कि अभियान के दौरान हर जिले में प्रशासन, स्कूल और सामाजिक संगठनों की मदद से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

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