राजधानी भोपाल में सोमवार को राज्य स्तरीय वार्षिक समीक्षा एवं समन्वय बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के संयुक्त तत्वाधान में, एम्बेड प्रोजेक्ट फैमिली हेल्थ इंडिया द्वारा होटल पलाश रेजीडेंसी में आयोजित हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में मलेरिया उन्मूलन की प्रगति की समीक्षा और आगामी रणनीति पर चर्चा करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ की गई। क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. संतोष भार्गव ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और बैठक के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह राज्य और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय से मलेरिया नियंत्रण को और मजबूत किया जा सकता है।
भोपाल में वाहक जनित रोगों पर विशेष प्रस्तुति
बैठक में मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु जायसवार, राज्य कार्यक्रम अधिकारी, वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम, ने मध्य प्रदेश में वाहक जनित रोगों की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जिलों में किए गए नवाचारों को साझा करते हुए कहा कि सफल मॉडलों को पूरे प्रदेश में अपनाने की जरूरत है। बालाघाट जिले में शुरू किए गए वालेंटियर लेड मॉडल की उन्होंने खास तौर पर सराहना की।
डॉ. हिमांशु जायसवार ने कहा कि मलेरिया उन्मूलन तभी संभव है जब राज्य और जिला स्तर पर निरंतर समन्वय बना रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य स्तर से सभी जिलों को आवश्यक तकनीकी और रणनीतिक सहयोग दिया जाएगा। साथ ही वालेंटियर आधारित मॉडल को अन्य जिलों में भी विस्तार देने के निर्देश दिए गए।
सामने आई तस्वीर
बैठक के दौरान बालाघाट, जबलपुर, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और सीहोर जिलों के जिला मलेरिया अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इन प्रस्तुतियों में एम्बेड प्रोजेक्ट के तहत की गई गतिविधियों, उपलब्धियों और चुनौतियों को साझा किया गया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य समन्वयक डॉ. देवेंद्र सिंह तोमर ने मलेरिया उन्मूलन रणनीति पर सत्र का नेतृत्व किया। उन्होंने विदिशा और शाजापुर जिलों के क्षेत्र भ्रमण की रिपोर्ट साझा करते हुए स्थानीय स्तर पर सुधार के सुझाव दिए। वहीं भारत सरकार के सलाहकार पवन मेहरा ने अंतर-जिला और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने की जरूरत बताई।
संयुक्त कार्ययोजना के साथ समापन
बैठक के अंत में मलेरिया उन्मूलन को लेकर एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार की गई। सभी जिलों को निर्देश दिए गए कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नवाचार अपनाएं। कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन के साथ हुआ, जिसमें स्वास्थ्य विभाग, फैमिली हेल्थ इंडिया और अन्य सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
