मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद राजधानी भोपाल स्थित मंत्रालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। वल्लभ भवन, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन में सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के अधिकारियों ने सुबह 10 बजे प्रमुख विभागों में पहुंचकर हाजिरी रजिस्टर की जांच की। इस दौरान एसीएस संजय शुक्ला ने औचक निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपने-अपने विभागों में उपस्थिति की समीक्षा के निर्देश दिए।
सूत्रों के अनुसार, सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अधिकारियों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। उपस्थिति से जुड़ी जानकारी शाम 6 बजे तक एकत्र कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। लंच के बाद दफ्तर से नदारद रहने वाले सेक्शन ऑफिसर से लेकर एडिशनल सेक्रेटरी स्तर तक के अधिकारियों की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजी गई है।
भोपाल मंत्रालय में उपस्थिति पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो सप्ताह में छह दिन काम करने की पुरानी व्यवस्था दोबारा लागू की जा सकती है। इसके साथ ही दूसरे और चौथे शनिवार को मिलने वाला अवकाश भी समाप्त किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि समय पर उपस्थिति से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी और फाइलों का निपटारा समय पर होगा।
देरी का असर सैकड़ों फाइलों पर
पूर्व लोक प्रशासन सलाहकार डॉ. आरके मिश्रा के अनुसार, मंत्रालय के एक सेक्शन में प्रतिदिन 25 से 40 फाइलें संचालित होती हैं। यदि सेक्शन ऑफिसर 30 से 45 मिनट देर से पहुंचे तो 10 से 12 फाइलें रुक जाती हैं। मंत्रालय में कुल 144 सेक्शन हैं। यदि इनमें से 30 प्रतिशत सेक्शन में देरी हो तो 400 से 500 फाइलें प्रभावित हो सकती हैं। इससे निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ती है और आम जनता के कार्यों में विलंब होता है।
सरकार का उद्देश्य मंत्रालय में कार्य संस्कृति को सुधारना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का कहना है कि नियमित निगरानी से अनुशासन में सुधार होगा और कामकाज अधिक प्रभावी बनेगा। आने वाले दिनों में उपस्थिति व्यवस्था को और सख्त किया जा सकता है।
