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खजुराहो समीक्षा बैठक से पहले बड़ा हंगामा, हजारों किसानों ने लगाई हाईवे पर बेमियादी जाम

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Published On: 8 December 2025

खजुराहो में मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण विभागीय समीक्षा बैठक चल रही थी, लेकिन उससे पहले पूरे इलाके में किसानों का गुस्सा उफान पर दिखाई दिया। खाद की किल्लत से परेशान किसानों ने सोमवार सुबह बमीठा थाना क्षेत्र में एनएच-39 पर विशाल जाम लगा दिया। प्रदर्शन इतना बड़ा था कि खजुराहो की ओर जा रहे मंत्रियों के वाहनों की आवाजाही तक प्रभावित हो गई, जहाँ एक ओर प्रशासन समीक्षा बैठक की तैयारियों में जुटा था, वहीं दूसरी ओर पास की सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। हरपालपुर में भी किसानों ने झांसी–मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग-76 को थाने के सामने ही जाम कर दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी किसानों को समझाने में लगे रहे, लेकिन भीड़ लगातार बढ़ती गई और हालात नियंत्रण से बाहर होते दिखे।

अधिकारियों के अनुसार, सुबह से 1,300 से अधिक टोकन बांटे जा चुके थे, फिर भी किसान लगातार केंद्रों पर उमड़ते रहे। खजुराहो की सटई रोड स्थित मंडी में किसान देर रात से ही लाइन में खड़े दिखाई दिए। पिछले सप्ताह भी इसी मंडी में भारी भीड़ के कारण हालात बिगड़े थे और किसानों ने सड़क पर जाम लगाया था।

मनमानी से बढ़ा तनाव

स्थिति पिछले दिनों उस समय और बिगड़ गई जब सौरा मंडल की तहसीलदार ऋतु सिंघई द्वारा एक छात्रा को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल हो गया। इसके बाद ईसानगर के तहसीलदार आकाश नीरज और एसडीएम अखिल राठौर पर भी महिलाओं के साथ अभद्रता व धक्कामुक्की के आरोप लगे। कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद ऋतु सिंघई की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

कार्रवाई शून्य

किसानों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण यह है कि गंभीर आरोपों के बावजूद किसी अधिकारी पर अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरी ओर, लवकुशनगर सहित कई क्षेत्रों में खाद वितरण केंद्रों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। बुवाई का महत्वपूर्ण समय होने के कारण किसानों की परेशानी दोगुनी हो गई है।

खाद की ब्लैकमार्केटिंग के आरोप

किसानों ने आरोप लगाया है कि खाद की आपूर्ति कम होने के कारण बाजार में ब्लैक-मार्केटिंग चरम पर है। किसानों के अनुसार, डीएपी 1,900-2,000 रुपये, जबकि यूरिया 500-600 रुपये प्रति बोरी तक बेचा जा रहा है, जो निर्धारित दरों से काफी अधिक है। प्रशासन इन शिकायतों की जांच की बात तो कर रहा है, लेकिन गांवों में किसानों का भरोसा लगातार कमजोर होता दिख रहा है।

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