राजधानी भोपाल के तुलसी नगर स्थित अंबेडकर मैदान हजारों अतिथि शिक्षकों की आवाज से गूंज उठा। प्रदेशभर से आए ये शिक्षक “गुरु दक्षिणा” कार्यक्रम के तहत अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर इकट्ठा हुए। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी सेवा और भविष्य के प्रति गंभीर नहीं है।
मंत्री को सौंपा जाएगा प्रस्ताव
इस कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को भी आमंत्रित किया गया है। शिक्षकों का इरादा है कि वे मंत्री के सामने अपनी समस्याएं और मांगें सीधे रखेंगे। उनका कहना है कि जैसे पहले “गुरुजी” शिक्षकों को स्थायीत्व और नियमितीकरण का लाभ मिला था, वैसे ही अतिथि शिक्षकों के लिए भी एक स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
संघों ने कही ये बात
आजाद अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष पुष्कर (सिंगरौली) ने बताया कि कार्यक्रम के लिए पुलिस से एनओसी ली गई है और आयोजकों को सिर्फ निर्धारित कार्यक्रम करने की अनुमति दी गई है। वहीं अतिथि शिक्षक समन्वय संघ के प्रतिनिधि सुनील सिंह परिहार ने कहा कि प्रदेशभर से आए अतिथि शिक्षक एक ही आवाज़ में अपनी मांगों को सरकार तक पहुँचाना चाहते हैं।
मुख्य मांगें
- अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित किया जाए।
- सीधी भर्ती, प्रमोशन या अन्य नियुक्तियों के कारण लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को सेवा से बाहर न किया जाए।
- 18 साल से सेवा दे रहे कई शिक्षकों को बिना किसी विकल्प के बाहर कर देना अन्याय है।
- अतिथि शिक्षकों के लिए भी अवकाश नीति लागू की जाए। जैसे नियमित कर्मचारियों को 13 कैजुअल लीव (CL) और 3 अर्जित अवकाश (EL) मिलते हैं, वैसे ही अधिकार अतिथि शिक्षकों को भी दिए जाएं।
स्थायीत्व से मिलेगा सम्मान
शिक्षकों का कहना है कि वे बच्चों की शिक्षा में बराबर योगदान देते हैं, लेकिन अस्थायी व्यवस्था के कारण उनका जीवन असुरक्षित बना हुआ है। स्थायीत्व और उचित अधिकार मिलने पर ही उन्हें असली सम्मान मिलेगा।
