सिंगरौली जिले के आदिवासी बहुल इलाकों से पहुंचे एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। यह बैठक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के चेंबर में हुई, जहां प्रतिनिधिमंडल ने जिले की जमीनी हकीकत और वर्षों से चली आ रही समस्याओं को विस्तार से सामने रखा। बातचीत के बाद राहुल गांधी ने सिंगरौली आने का भरोसा दिलाया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सिंगरौली में औद्योगिक गतिविधियों, बिजली परियोजनाओं और खनन कार्यों के चलते बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है। कई परिवार आज भी उचित मुआवजे और पुनर्वास के इंतजार में हैं। जमीन जाने के बाद रोजगार के विकल्प नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
सिंगरौली आदिवासी प्रतिनिधिमंडल
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रोजगार के अभाव को बड़ी समस्या बताया। उनका कहना था कि स्थानीय युवाओं को परियोजनाओं में प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। कई इलाकों में स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी सुविधाओं का अभाव है, जिससे ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है।
प्रियंका गांधी ने भी सुनी समस्याएं
बैठक के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं। उन्होंने आदिवासी प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को पार्टी स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा। प्रियंका गांधी ने कहा कि आदिवासियों के अधिकार, सम्मान और जीवन स्तर से जुड़े मुद्दे कांग्रेस की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi और कांग्रेस महासचिव श्रीमती @priyankagandhi जी ने जनसंसद में सिंगरौली से आए आदिवासी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
मोदी सरकार पूंजीपतियों के फायदे के लिए आदिवासियों का हक छीन रही है, उनके जल-जंगल-जमीन पर कब्जा कर रही है।
लेकिन ये तानाशाह सरकार याद… pic.twitter.com/ysoNLXaHfR
— Congress (@INCIndia) February 7, 2026
सिंगरौली आने का मिला आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी को सिंगरौली आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया। उनका कहना था कि यदि वे स्वयं क्षेत्र में आकर हालात देखेंगे, तो जमीनी सच्चाई और बेहतर तरीके से सामने आएगी। इस पर राहुल गांधी ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए सिंगरौली आने का आश्वासन दिया और कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को संसद और अन्य मंचों पर उठाया जाएगा।
दिल्ली से लौटते समय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि इस मुलाकात से उन्हें नई उम्मीद मिली है। उनका मानना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी आवाज सुनी जाएगी, तो सिंगरौली के आदिवासी इलाकों में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
