कटनी में बुधवार को माहौल अचानक गरमा गया, जब कांग्रेस से जुड़े आदिवासी संगठन और अन्य आदिवासी ग्रुप बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। हाथों में पोस्टर-प्लकार्ड, मुंह पर नाराजगी और सरकार व स्थानीय विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। आंदोलनकारी कलेक्टर ऑफिस के बाहर इकट्ठा हुए और थोड़ी देर में ही पूरा परिसर शोर से गूंज उठा। इस दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, इसी दौरान हल्की धक्का-मुक्की भी हो गई, लेकिन हालात तुरंत सामान्य करा दिए गए।
क्या है पूरा विवाद?
प्रदर्शन में शामिल दिव्यांशु मिश्रा ने बताया कि यह पूरा आंदोलन आदिवासी जमीन घोटाले के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर किया गया है। उनका आरोप है कि राघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से जुड़े मामलों में जिला प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। दिव्यांशु के मुताबिक, 29 सितंबर 2025 को पूरे दस्तावेजों के साथ शिकायत कलेक्टर के पास जमा की गई थी। शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि चार आदिवासी नत्थू कोल, प्रहलाद कोल, राकेश सिंह गौड़ और रघुराज सिंह गौड़ की जमीनों से जुड़े मामले में भारी गड़बड़ी हुई है, लेकिन इतने दिनों बाद भी इन चारों आदिवासियों के बयान तक दर्ज नहीं किए गए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जांच अधिकारी ने पिछले 25 वर्षों में इन आदिवासियों के बैंक खातों से हुए लेन-देन की जानकारी तक इकट्ठी नहीं की, जबकि यह मामला 9 जून 2025 को पुलिस अधीक्षक के पास भी भेजा गया था। दिव्यांशु मिश्रा के बयान तो 20 जून को ले लिए गए, लेकिन पीड़ितों के बयान आज तक पेंडिंग हैं।
क्या मांग की गई?
डिप्टी कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में इन मुख्य मांगों को उठाया गया कि चारों आदिवासी पीड़ितों के बयान तुरंत दर्ज किए जाएं। पिछले 25 वर्षों की बैंक डिटेल निकालकर जांच की जाए।जमीन घोटाले की जांच में तेजी लाई जाए। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक पर FIR सहित अन्य कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मामले में निष्पक्ष जांच शुरू नहीं होती, उनकी आंदोलन की रफ्तार कम नहीं होगी। बुधवार का प्रदर्शन फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हुआ, लेकिन संगठनों ने साफ कर दिया कि जरूरत पड़ी, तो वे बड़ा आंदोलन भी कर सकते हैं।
