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उमा भारती का बड़ा बयान, “देश का सबसे बड़ा दुश्मन भ्रष्टाचार, राजनीतिक दल हों एकजुट”

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Published On: 22 November 2025

भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित अपने निवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कई संवेदनशील और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बयान दिए। उन्होंने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ा चैलेंज बाहर से नहीं, बल्कि अपने ही देश के अंदर फैला भ्रष्टाचार है। इसे खत्म करना सभी राजनीतिक दलों का साझा लक्ष्य होना चाहिए। उमा भारती ने आरक्षण पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जहां आरक्षण पहले से लागू है, उसके अलावा भी महत्वपूर्ण पदों पर वंचित वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और समानता तभी मजबूत होगी, जब राजनीतिक पार्टियां अपने स्तर पर एकजुट होकर वंचितों के लिए रास्ते खोलें।

गाय संरक्षण के मुद्दे पर उमा ने साफ कहा कि गाय तभी बचेगी जब किसान इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि गंगा और अन्य नदियों को बचाना भी देश की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इस दिशा में सरकार और समाज दोनों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।

शराबबंदी पर फिर सख्त रुख

अपने पुराने एजेंडे को दोहराते हुए उमा भारती ने शराबबंदी को “जरूरी कदम” बताया। उन्होंने कहा कि शराब को तुरंत नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाना चाहिए। समाज धीरे-धीरे बदलाव की ओर बढ़ भी रहा है। लव जिहाद पर पूछे गए सवाल पर उमा ने साफ कहा कि अगर कोई युवक अपना धर्म छुपाकर किसी लड़की से संबंध बनाए और शादी के बाद धर्म बदलने का दबाव डाले, तो यह लव जिहाद है और ऐसे मामलों को संजीदगी से देखा जाना चाहिए।

“भारत पहले से हिन्दू राष्ट्र है”

उमा भारती ने कहा कि पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने हिन्दू एकता और राष्ट्र की बात कही है, और ऐसी विभूतियां बुंदेलखंड जैसी मिट्टी से ही निकलती हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत हिन्दू राष्ट्र है। इसे बनाना नहीं, सिर्फ स्वीकार करना है। उनके अनुसार, भारत की सेक्युलर पहचान हिंदू संस्कृति की वजह से ही संभव है, क्योंकि यहां सर्वधर्म समभाव और विविधता में एकता का विचार हमेशा से रहा है। उन्होंने कहा कि समाज में एकता तभी आएगी, जब सभी जातियों के प्रति उदारता दिखाई जाएगी और आर्थिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। उमा ने कहा कि बहुसंख्यक होते हुए भी हमें अपने धार्मिक स्थलों पर अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है, क्योंकि समाज में अभी भी एकता की कमी है। उनके इन बयानों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है और कई मुद्दों पर एक बार फिर चर्चा गर्म होने के आसार हैं।

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