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यूनियन कार्बाइड मामले में सुनवाई तेज, दोषी अधिकारी की मौत पर कोर्ट ने मांगा सत्यापन; 20 जनवरी को होंगे अंतिम तर्क

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Published On: 13 January 2026

भोपाल में सोमवार को यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड और उसके भारतीय अधिकारियों से जुड़े बहुचर्चित आपराधिक मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय (DJ कोर्ट) में सुनवाई हुई। यह मामला यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी से जुड़ी क्रिमिनल अपील का है, जिसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वर्ष 2010 के फैसले के खिलाफ दायर किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रकरण की मौजूदा स्थिति और अभियुक्तों की जानकारी पर चर्चा की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को जानकारी दी गई कि यूनियन कार्बाइड के एक दोषी भारतीय अधिकारी शकील कुरैशी का निधन हो गया है। शकील कुरैशी माइथाइल आइसोसाइनेट (MIC) प्लांट में शिफ्ट सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। उनका निधन नागपुर में हुआ है। इस पर अदालत ने CBI को निर्देश दिए हैं कि वह आधिकारिक रूप से मृत्यु का सत्यापन कर रिपोर्ट पेश करे।

यूनियन कार्बाइड

जिला न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब तक शकील कुरैशी की मृत्यु का विधिवत सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक उनके संबंध में आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। CBI को आदेश दिया गया है कि वह संबंधित दस्तावेज और प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की गई है।

अगली तारीख पर होंगे अंतिम तर्क

20 जनवरी को होने वाली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। इस दिन CBI अपनी ओर से यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकारियों के खिलाफ दायर क्रिमिनल अपील में अंतिम तर्क पेश करेगी। इसके बाद आरोपी अधिकारी और कंपनी की ओर से भी अदालत में अपने अंतिम पक्ष रखे जाएंगे। लंबे समय से लंबित इस मामले में फैसला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है।

2010 के फैसले के बाद लंबा कानूनी सफर

गौरतलब है कि 7 जून 2010 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) भोपाल ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड और उसके 8 भारतीय अधिकारियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304A के तहत दोषी करार दिया था। इसके बाद CBI ने सजा बढ़ाने और धाराएं बदलने को लेकर क्रिमिनल अपील दायर की थी। पिछले 15 वर्षों में चली इस अपील के दौरान अब तक 5 दोषी अधिकारियों की मृत्यु हो चुकी है।

पीड़ितों की नजरें अब फैसले पर

यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी से जुड़े इस मामले को लेकर पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों की निगाहें अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। दशकों बाद भी न्याय की प्रक्रिया पूरी न होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब अंतिम बहस की तैयारी से उम्मीद जगी है कि मामले में जल्द कोई ठोस निर्णय सामने आएगा।

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