भोपाल | गांधीनगर स्थित बालक छात्रावास सोमवार को एक अलग ही माहौल में सराबोर था। अवसर था विमुक्त घुमंतू दिवस का, जिसे इस बार खास उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। आयोजन केवल सांस्कृतिक रंगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विमुक्त एवं घुमंतू समाज की पहचान, उनके संघर्ष, समस्याओं और उत्थान के रास्तों पर गहन विमर्श का मंच बन गया।
अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम की शुरुआत माँ शारदे के समक्ष पुष्प अर्पण से हुई। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि विजय तिवारी, हेमराज नायक, भारत सिंह सोलंकी, बाबूलाल बंजारा, रमेश सरदार, विनोद शर्मा और संजय मौजूद रहे। सामाजिक संगठनों से मुस्कान संस्था के अजय कुमार और संवेदना समिति के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
सहायक संचालक कार्यालय के संजय श्रीवास्तव और योगेश सक्सेना ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने समाज के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विमुक्त एवं घुमंतू समुदाय भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं, जिन्हें लंबे समय तक हाशिए पर रखा गया लेकिन अब वे शिक्षा और जागरूकता से नई राह बना रहे हैं।
गूंजा छात्रावास
आयोजन में बालक छात्रावास के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत, कविताएँ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। बच्चों की ऊर्जा और उत्साह ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। दर्शकगणों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया। वक्ताओं ने समाज की ऐतिहासिक यात्रा और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह समुदाय वर्षों तक ‘अपराधी जाति’ के कलंक के बोझ तले दबा रहा, लेकिन आज शिक्षा और अवसर के सहारे अपनी नई पहचान गढ़ सकता है।
अतिथियों ने विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और तकनीक अपनाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज को नई ऊँचाई तक ले जाने की सबसे बड़ी कुंजी है। इस अवसर पर शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की गई और बच्चों को योजनाओं से जुड़ी पुस्तिकाएँ वितरित की गईं। साथ ही समाज की महान विभूतियों और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान का भी उल्लेख किया गया।
आयोजन का संदेश
समापन सत्र में आयोजन प्रभारी शाहीद ने कहा कि विमुक्त घुमंतू दिवस तभी सार्थक होगा जब समाज के बच्चों को शिक्षा और संसाधनों तक समान अवसर मिले। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज की शक्ति, संघर्ष और संभावनाओं को उजागर करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि समाज और शासन जब साथ मिलकर कदम बढ़ाते हैं, तब कोई भी बाधा विकास की राह नहीं रोक सकती। यह आयोजन भविष्य की दिशा तय करने वाला प्रेरणादायी क्षण सिद्ध हुआ, जिसने समाज को यह विश्वास दिलाया कि बदलाव संभव है और आने वाली पीढ़ियाँ उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होंगी।
