राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर बैरसिया तहसील के ग्राम दिल्लौद में नशा मुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और MP राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशों के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और उन्हें स्वस्थ, जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करना रहा।
ग्राम पंचायत परिसर और उच्च माध्यमिक विद्यालय दिल्लौद में आयोजित इस विधिक जागरूकता शिविर में ग्रामीण परिवेश के साथ-साथ विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। शिविर में आमजन, छात्र-छात्राएं, युवा, महिलाएं और बालिकाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहीं। आयोजन के जरिए यह संदेश दिया गया कि नशा केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है।
MP News: नशे के खिलाफ कानून
कार्यक्रम में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की अहमियत पर विशेष रूप से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि नशे की आदत कैसे धीरे-धीरे जीवन को खोखला कर देती है और कई बार व्यक्ति को कानूनी परेशानियों में भी फंसा देती है। नशा मुक्त भारत योजना के तहत चल रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए लोगों को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भोपाल के सचिव, न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल ने नशे के दुष्प्रभावों के साथ-साथ उससे बचने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कानून किस तरह नशे से जुड़े अपराधों पर सख्ती करता है और आम नागरिकों के अधिकार क्या हैं। महिलाओं और बालिकाओं द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देकर उन्हें कानूनी रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया गया।
नालसा-सालसा योजनाओं की जानकारी
शिविर के दौरान नालसा और सालसा की विभिन्न योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया गया, ताकि समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक न्याय की पहुंच आसान हो सके। लोगों को मुफ्त विधिक सहायता, परामर्श और अन्य सुविधाओं की जानकारी दी गई, जिससे वे बिना डर के अपने अधिकारों का उपयोग कर सकें। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ता लखनलाल खाती, जिला पंचायत और जनपद पंचायत के सदस्य, ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव, विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दोहराया।
इस जागरूकता शिविर ने यह स्पष्ट कर दिया कि कानून और समाज दोनों मिलकर ही नशे जैसी बुराई से लड़ सकते हैं। गांव से उठी यह पहल युवाओं को सही दिशा देने की एक मजबूत कोशिश मानी जा रही है।
