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सतना के धारकुंडी आश्रम में शोक की लहर, 102 वर्षीय संत परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज का निधन

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Published On: 8 February 2026

सतना के धारकुंडी आश्रम के 102 वर्षीय संत परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज का निधन हो गया। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर के साथ ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। उनकी पार्थिव देह को रविवार को धारकुंडी आश्रम में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। आश्रम परंपरा के अनुसार सोमवार को उन्हें समाधि दी जाएगी।

संत के अंतिम दर्शन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार दोपहर 3.40 बजे धारकुंडी आश्रम पहुंचेंगे। वहीं डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल पहले ही आश्रम पहुंच चुके हैं। प्रशासन और आश्रम प्रबंधन की ओर से अंतिम दर्शन और समाधि कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।

सतना के धारकुंडी आश्रम में शोक की लहर

परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने मात्र 22 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन त्यागकर वैराग्य धारण कर लिया था। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव कल्याण, आध्यात्मिक जागरण और समाज को दिशा देने में समर्पित कर दिया। उनका जीवन सादगी, तप और साधना का उदाहरण माना जाता है। आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, वे अंतिम समय तक साधना और मार्गदर्शन में सक्रिय रहे।

ग्रंथ रचना से दिया आध्यात्मिक संदेश

संत सच्चिदानंद महाराज ने आध्यात्मिक ज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने ‘मानस बोध’ और ‘गीता बोध’ जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की, जिन्हें आज भी श्रद्धालु और साधक पढ़ते हैं। उनके प्रवचनों और विचारों पर आधारित कई पुस्तकें भी आश्रम की ओर से प्रकाशित की गईं, जिनसे जिज्ञासुओं को जीवन और अध्यात्म की दिशा मिली।

मिली जानकारी के अनुसार, परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने अपने जीवनकाल में ही अपने समाधि स्थल का चयन कर लिया था। उनकी पार्थिव काया को धारकुंडी आश्रम के गर्भगृह में समाधि दी जाएगी। इसे लेकर आश्रम परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं और पूरे वातावरण में शांति और श्रद्धा का भाव है।

संत समाज की मौजूदगी से गूंजा आश्रम

संत के गुरु भाई, चुनार के सक्तेशगढ़ आश्रम के स्वामी अडग़ड़ानंद महाराज शनिवार शाम को ही धारकुंडी आश्रम पहुंच गए थे। इसके अलावा आश्रम से जुड़े अन्य संत रामायण महाराज, वीरेन्द्र कुमार महाराज और विजय महाराज भी यहां मौजूद हैं। सभी संतों और श्रद्धालुओं ने परमहंस सच्चिदानंद महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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