सतना जिले में नापतौल विभाग पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि विभाग का काम केवल वसूली तक सीमित रह गया है, जबकि इसका मूल उद्देश्य गुणवत्ता नियंत्रण और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। बीते एक साल में जिले में नापतौल विभाग की ऐसी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई, जो आम जनता के लिए ज्ञात हो या जिसे लोग सराह सकें।
सूत्रों के अनुसार, सतना शहर और आसपास के क्षेत्र में नापतौल विभाग के इंस्पेक्टर दीपक गौड़ और अन्य जिम्मेदार अधिकारी गड़बड़ी करने वाले कारोबारियों से संपर्क स्थापित करके हर महीने मोटी रकम वसूलते रहे हैं। पंचायत मेल की टीम जब इंस्पेक्टर दीपक गौड़ से बीते एक साल में हुई बड़ी कार्रवाई के बारे में पूछती है, तो लगभग तीन मिनट की बातचीत के दौरान भी उन्होंने कोई ठोस जानकारी नहीं दी।
भ्रष्टाचार और मनमानी
महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि नापतौल विभाग का कार्यालय आम लोगों के लिए स्पष्ट नहीं है। जनता नहीं जानती कि शिकायत या जांच के लिए कहां संपर्क करना चाहिए। विभाग के पास शक्तियां और अधिकार पर्याप्त हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और मनमानी के कारण ये अधिकार जनता की सुरक्षा के बजाय अधिकारियों की सुविधा के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिले और किसी भी तरह की वसूली या लूटबाजियों को रोका जाए। बावजूद इसके, सतना जिले में पदस्थ कुछ अधिकारी इस दिशा में गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं।
उपभोक्ताओं में असंतोष
स्थानीय लोगों का कहना है कि नापतौल विभाग की इस स्थिति से उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। दुकानदार और आम ग्राहक दोनों ही डर और असमंजस की स्थिति में हैं। भ्रष्टाचार और मनमानी के कारण विभाग की विश्वसनीयता धूमिल हो चुकी है, और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का कोई तंत्र दिखाई नहीं दे रहा।
जनता और व्यापारी दोनों ही इस बात पर नाराज हैं कि उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए बनाए गए इस विभाग में बैठे अफसर खुद नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। सवाल उठता है कि जब सतना में नापतौल विभाग की कार्यप्रणाली ही संदिग्ध हो, तो आम नागरिक की सुरक्षा और उपभोक्ता हित की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
