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भोपाल में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद, 7 फरवरी से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन; जानें पूरी प्रक्रिया

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Published On: 5 February 2026

भोपाल में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन 7 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। इस बार पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, ताकि किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि किसान सहकारी समिति या अपने मोबाइल फोन से पंजीयन करते हैं, तो उनसे किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

किसान एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और प्राइवेट साइबर कैफे के माध्यम से भी पंजीयन करा सकते हैं। हालांकि इन केंद्रों पर रजिस्ट्रेशन कराने पर किसानों को प्रति पंजीयन अधिकतम 50 रुपये तक फीस देनी होगी। भोपाल जिले में किसानों की सुविधा के लिए कुल 47 सहकारी समितियों में पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं, जहां नि:शुल्क रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा।

भोपाल में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद

रजिस्ट्रेशन के दौरान किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज अपने साथ रखने होंगे। इनमें जमीन की किताब, आधार कार्ड और बैंक खाते की पासबुक शामिल है। यह जरूरी है कि किसान का बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक हो। अगर खाता आधार से लिंक नहीं है, तो समर्थन मूल्य का भुगतान अटक सकता है। ऐसे किसानों को सलाह दी गई है कि वे पहले ही यह प्रक्रिया पूरी करा लें।

किसान का पंजीयन तभी मान्य होगा, जब भू-अभिलेख में दर्ज खसरा, खाता और आधार कार्ड की जानकारी आपस में मेल खाए। यदि किसी तरह की विसंगति सामने आती है, तो उसका सुधार तहसील कार्यालय के माध्यम से कराया जा सकेगा। पंजीयन राजस्व विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध गिरदावरी के आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है।

7 फरवरी से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन

अगर पंजीयन के समय बोए गए रकबे या फसल से जुड़ी जानकारी में अंतर दिखाई देता है, तो संबंधित तहसीलदार के यहां संशोधन की व्यवस्था की गई है। ऐसी स्थिति में किसान को तुरंत तहसील कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई है। पंजीयन के लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर OTP आना जरूरी होगा। बिना OTP सत्यापन के रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं होगा। इसलिए किसान यह भी सुनिश्चित करें कि उनके आधार में सही मोबाइल नंबर दर्ज हो।

विशेष श्रेणी के किसानों के लिए नियम

यदि किसान की भूमि एक ही जिले के अलग-अलग गांवों में है, तो पंजीयन में सभी गांवों के रकबे जोड़े जा सकते हैं। दूसरी ओर, अगर भूमि किसी अन्य जिले में है, तो उस जिले में अलग से पंजीयन कराना होगा। सिकमी, बंटाईदार और वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन केवल सहकारी समिति के माध्यम से ही किया जाएगा।

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