ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर छात्रों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नए नियमों के तहत साल में दो बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराने की बात कही थी। इसके लिए दिसंबर 2025 में नोटिफिकेशन जारी होने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन फरवरी तक एक भी प्रवेश परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। इस अनिश्चितता के चलते सैकड़ों छात्र असमंजस की स्थिति में हैं।
छात्रों के बीच सबसे बड़ी उलझन इस बात को लेकर है कि पीएचडी में प्रवेश केवल यूजीसी नेट के आधार पर होगा या विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित प्रवेश परीक्षा के जरिए भी मौका मिलेगा। विश्वविद्यालय की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। नतीजतन, छात्र रोजाना विश्वविद्यालय के विभागों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है।
जीवाजी विश्वविद्यालय
हाल ही में यूजीसी नेट परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह स्थिति और ज्यादा चिंताजनक है। नेट स्कोर कार्ड की वैधता केवल एक वर्ष होती है। यदि समय रहते पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो कई छात्रों का नेट स्कोर अमान्य हो सकता है। ऐसे में उन्हें दोबारा नेट परीक्षा देनी पड़ेगी, जिससे उनका एक पूरा शैक्षणिक वर्ष खराब होने की आशंका है।
यूजीसी के नए नियमों से बढ़ी चिंता
आंकड़ों के मुताबिक सत्र 2025-26 से यूजीसी ने पीएचडी प्रवेश के लिए नेट को अनिवार्य कर दिया है। पिछले एक साल में विभिन्न विषयों और श्रेणियों में 300 से अधिक अभ्यर्थी नेट क्वालीफाई कर चुके हैं। यदि इसी सत्र में प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, तो इन छात्रों का एक वर्ष बच सकता है। देरी होने पर यह अवसर हाथ से निकल सकता है।
प्रवेश परीक्षा हुई तो बढ़ेगी भीड़
यदि विश्वविद्यालय पीएचडी प्रवेश के लिए अपनी प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है, तो उसमें 2000 से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में समय पर नोटिफिकेशन और स्पष्ट नियम जारी न होने से परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों में भी असमंजस बना हुआ है।
इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी विमलेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा से जुड़े कुछ नए नियम सामने आए हैं, जिसके कारण प्रक्रिया में देरी हुई है। प्रवेश परीक्षा समिति से चर्चा कर जल्द ही आगे का कार्यक्रम तय किया जाएगा। हालांकि छात्रों का कहना है कि जब तक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक उनकी चिंता कम नहीं होगी।
