मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शुक्रवार को ग्वालियर स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश नहीं हुए। अदालत ने उन्हें दूसरी बार जमानती वारंट जारी कर तलब किया था, लेकिन पहली बार की तरह इस बार भी वे अनुपस्थित रहे। उनकी गैरहाजिरी के कारण आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामले में ट्रायल की कार्यवाही शुरू नहीं हो सकी।
यह मामला वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भिंड-दतिया संसदीय क्षेत्र में दिए गए एक बयान से जुड़ा है। चुनाव प्रचार के दौरान पटवारी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा के साथ मिले होने का आरोप लगाया था। बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और विवाद ने कानूनी रूप ले लिया।
जीतू पटवारी
बसपा की ओर से 4 मई 2024 को भिंड के ऊमरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयान से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। पुलिस ने जांच के बाद प्रकरण दर्ज कर लिया और मामला अदालत में पेश किया।
किन धाराओं में दर्ज है केस
पटवारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 123(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट में चालान पेश कर दिया। अदालत ने सुनवाई के लिए तलब किया था, लेकिन पेशी न होने से कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।
आगे की सुनवाई पर टिकी नजरें
अब अदालत की अगली तारीख पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि अगली सुनवाई में भी अनुपस्थिति रहती है तो कोर्ट सख्त रुख अपना सकता है। राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है। चुनावी बयानबाजी से जुड़े मामलों में अदालत की सख्ती को लेकर यह प्रकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
