मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को “औकात में रहने” की नसीहत दे दी। सदन में की गई इस टिप्पणी के बाद विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी और हंगामा शुरू हो गया। बयान के दूसरे ही दिन यह मुद्दा विधानसभा से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया।
यूथ कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर मंत्री का पुतला दहन किया गया और इस्तीफे की मांग उठाई गई। ग्वालियर में जीवाजी विश्वविद्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मंत्री को सार्वजनिक रूप से अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।
कैलाश विजयवर्गीय
एनएसयूआई नेताओं ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने इंदौर में हुई मौतों के मामले पर सवाल उठाए थे, जिसके जवाब में मंत्री ने व्यक्तिगत टिप्पणी की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल पूछने का अधिकार है और जवाब तथ्यों से दिया जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों से। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री इंदौर की घटना पर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
माफी नहीं तो तेज होगा आंदोलन
यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मंत्री ने माफी नहीं मांगी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है और इसे दबाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। कई जिलों में ज्ञापन सौंपे गए और आगे भी विरोध कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई गर्माहट पैदा कर दी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल, नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मंत्री की ओर से इस विवाद पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है।
