महू के कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए थे। इलाज के दौरान स्टार हेल्थ कंपनी ने 2,78,583 रुपए का मेडिक्लेम रिजेक्ट कर दिया। कंपनी का तर्क था कि दरबार को पहले से हार्ट की तकलीफ थी और पॉलिसी में यह जानकारी छिपाई गई थी।
दरबार ने कंपनी के इस निर्णय के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। मामला करीब तीन साल तक फोरम में चला। फोरम ने दरबार की दलीलों को सही मानते हुए स्टार हेल्थ को आदेश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर इलाज की राशि 2,78,583 रुपए ब्याज सहित चुकाए। ब्याज के साथ यह राशि करीब 4 लाख रुपए बनती है।
महू के पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार
दरबार ने कोरोना महामारी के दौरान स्टार हेल्थ की ‘कोरोना कवच पॉलिसी’ ली थी। इस पॉलिसी के तहत 5 लाख रुपए तक इलाज का कवरेज मिलता था। दरबार ने यह पॉलिसी 20 अगस्त 2020 को ली थी, जो 1 जून 2021 तक प्रभावी थी। इसके लिए उन्होंने 2,691 रुपए प्रीमियम अदा किया था। दरबार 28 अप्रैल 2021 से 6 मई 2021 तक डीएनएस हॉस्पिटल में एडमिट रहे। इलाज का कुल बिल 2,78,583 रुपए आया। इसके लिए दरबार ने क्लेम फॉर्म के साथ सभी बिल, जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज कंपनी को सौंपे।
कंपनी के विरोध
स्टार हेल्थ ने दावा किया कि दरबार को पहले से हार्ट की बीमारी थी और इसलिए पॉलिसी के तहत क्लेम देने से मना किया गया। फोरम ने इस दावे को खारिज करते हुए आदेश दिया कि कंपनी को इलाज की राशि ब्याज सहित चुकानी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती और पॉलिसी में छिपी जानकारी के आधार पर क्लेम रिजेक्शन के खिलाफ मिसाल साबित होगा। दरबार को अब 4 लाख रुपए मिलने हैं, जो उनके कोरोना इलाज का खर्च और ब्याज दोनों कवर करते हैं।
