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सिंहस्थ से पहले रफ्तार का तोहफा, इंदौर-उज्जैन के बीच दौड़ेगी वंदे भारत मेट्रो

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Published On: 28 December 2025

उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 को लेकर अब केंद्र सरकार ने भी अपनी तैयारियों को गति दे दी है। करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। इसी कड़ी में इंदौर और उज्जैन के बीच वंदे भारत मेट्रो चलाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। इस प्रस्ताव की सबसे खास बात यह है कि वंदे भारत मेट्रो के लिए अलग से नया रेलवे ट्रैक बिछाने की जरूरत नहीं होगी। ट्रेन मौजूदा ट्रैक पर ही दौड़ेगी। रेलवे पहले ही इस मार्ग पर 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का सफल ट्रायल कर चुका है, जिससे इस योजना को हरी झंडी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

इंदौर से उज्जैन के बीच वंदे भारत मेट्रो को शटल सेवा की तरह संचालित किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि यात्रियों को बार-बार और कम अंतराल में ट्रेन उपलब्ध होगी। परिचालन गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जिससे दोनों शहरों के बीच सफर बेहद तेज और सुगम हो जाएगा।

40 से 45 मिनट में तय होगा सफर

वंदे भारत मेट्रो के शुरू होने के बाद इंदौर से उज्जैन की दूरी महज 40 से 45 मिनट में पूरी हो सकेगी। यह ट्रेन एसी और नॉन-एसी दोनों विकल्पों के साथ आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। रेलवे इसे ‘नमो भारत ट्रेन’ के नाम से भी पहचान देने की तैयारी में है। इंदौर सांसद शंकर लालवानी के मुताबिक, सिंहस्थ के दौरान यात्रियों के भारी दबाव को देखते हुए रेल विभाग व्यापक योजना बना रहा है। इंदौर, उज्जैन और आसपास के स्टेशनों से 300 से ज्यादा ट्रेनों का संचालन प्रस्तावित है। वंदे भारत मेट्रो इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ साबित हो सकती है।

खास तौर पर डिजाइन हो रहे कोच

रेलवे सूत्रों के अनुसार, यह वंदे भारत मेट्रो 12 कोच की वर्ल्ड क्लास ट्रेन होगी। इसके कोच मेट्रो स्टाइल में डिजाइन किए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को आसानी से खड़े होकर भी सफर की सुविधा मिल सके। पहली ऐसी ट्रेन काशी में शुरू होगी, जिसके बाद इंदौर-उज्जैन रूट को जोड़ा जाएगा। तकनीकी रूप से यह ट्रेन काफी उन्नत होगी। अधिकारियों के अनुसार, वंदे भारत मेट्रो महज 5 सेकेंड में 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार पकड़ने में सक्षम होगी। इसकी डिजाइन स्पीड कुछ सेक्शन पर 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखी गई है।

एक साथ 3 हजार यात्रियों की क्षमता

इस हाई-स्पीड मेट्रो ट्रेन में करीब 1150 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी, जबकि लगभग दो हजार यात्री खड़े होकर भी सफर कर सकेंगे। सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन के लिए यह व्यवस्था यात्रियों को बड़ी राहत देने वाली साबित हो सकती है।

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