इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के कुतरने से दो नवजातों की मौत के मामले में अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 15 दिन बीत जाने के बाद भी कड़ी कार्रवाई न होने पर कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है और पूरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट 15 सितंबर तक मांगी है।
अदालत ने लिया स्वतः संज्ञान
न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति जेके पिल्लई की युगल पीठ ने इसे बच्चों के मौलिक अधिकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि सफाई और पेस्ट कंट्रोल संभालने वाली एजाइल सिक्योरिटी की लापरवाही साफ दिख रही है, फिर भी उस पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारियों और कंपनी पर सवाल
मामले की शुरुआत से ही जिम्मेदार अधिकारी तथ्यों को दबाने की कोशिश करते रहे। पहले कहा गया कि बच्चों की मौत गंभीर बीमारी से हुई है, चूहों के काटने से नहीं। यहां तक कि परिजन और अफसरों को यह गलत जानकारी दी गई कि पोस्टमार्टम हो चुका है। लेकिन जब ‘दैनिक भास्कर’ ने डिजिटल सबूतों के साथ सच्चाई उजागर की, तो हकीकत सामने आई। बाद में पोस्टमार्टम हुआ और परिजन ने शव का बॉक्स खोलकर देखा तो बच्चे की चार उंगलियां गायब थीं।
कार्रवाई पर भी उठे सवाल
शुरुआत में एजाइल सिक्योरिटी पर केवल 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और एमओयू बरकरार रखा गया। छोटे कर्मचारियों पर निलंबन और नोटिस जारी कर कार्रवाई दिखाई गई, जबकि असल जिम्मेदार कंपनी को बचाने की कोशिश की गई। इससे निचले स्तर के स्टाफ में नाराजगी फैल गई।
हाईकोर्ट के दबाव के बाद नए फैसले
अब प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य) ने एजाइल कंपनी को हटाने के निर्देश दिए हैं। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. बृजेश लाहोटी को पद से हटा दिया गया। वहीं, प्रभारी एचओडी डॉ. मनोज जोशी को सस्पेंड किया गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने खुद को बीमार बताते हुए 11 से 25 सितंबर तक छुट्टी ले ली है। हालांकि, माना जा रहा है कि उन्हें छुट्टी के बहाने हटाया गया।
नई समिति गठित
डॉ. बसंत निंगवाल को कार्यवाहक सुपरिटेंडेंट बनाया गया है। डॉ. अशोक लाढा को पीडियाट्रिक सर्जरी का प्रभार दिया गया, जबकि डॉ. सुमित सिंह और डॉ. रामू ठाकुर को नई जिम्मेदारिया दी गई हैं। साथ ही, पेस्ट कंट्रोल की निगरानी के लिए 5 सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो सभी अस्पतालों में सफाई और नियंत्रण की देखरेख करेगी।
