इंदौर में रिंग रोड परियोजना के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण के विरोध में सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए। किसानों ने अर्धनग्न होकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया और गले में सम्मान के मेडल व शील्ड टांगकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान एक किसान गर्मी की वजह से बेहोश हो गया, जिसे तत्काल उपचार के लिए ले जाया गया।
स्थिति को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने बगीचे में जमीन पर बैठकर किसानों से चर्चा की और उनकी समस्याएं सुनीं। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि प्रशासन उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार करेगा और समाधान की दिशा में प्रयास करेगा। करीब पांच घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद किसान शांतिपूर्वक लौट गए।
इंदौर में रिंग रोड परियोजना
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। उनका आरोप है कि सिंहस्थ 2026 की तैयारियों के नाम पर यह अधिग्रहण किया जा रहा है, जबकि इलाके में पहले से चार प्रमुख सड़कें मौजूद हैं। किसानों के अनुसार रिंग रोड के दायरे में आने वाली जमीन उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। यदि यह जमीन चली गई तो उनके परिवारों के सामने भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
1200 किसानों पर असर
किसान गौतम बंटू गुर्जर ने बताया कि पूर्वी क्षेत्र में पहले से ही RI-2, RI-3 और बाईपास जैसी सड़कें हैं। इसके बावजूद नई रिंग रोड परियोजना के चलते लगभग 1200 किसानों की जमीन प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यह उपजाऊ जमीन है, जहां अच्छी मात्रा में फसल उत्पादन होता है और इससे मालवा-निमाड़ क्षेत्र को लाभ मिलता है।
टकराव की स्थिति
किसानों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी उपजाऊ जमीन का विकल्प दिए बिना अधिग्रहण स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं प्रशासन का कहना है कि परियोजना क्षेत्र के यातायात सुधार और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहने की संभावना है।
