इंदौर और पीथमपुर के बीच 21 किलोमीटर लंबा आठ लेन का कॉरिडोर अब मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला परियोजना बन गया है। करीब 2360 करोड़ रुपए की लागत से यह महत्वाकांक्षी योजना मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के संचालक मंडल द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंजूरी पा गई।
यह परियोजना इंदौर से शुरू होकर पीथमपुर के एबी रोड में जुड़ेगी। इसके चलते इंदौर एयरपोर्ट, शहर और पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। केवल सड़क नहीं, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा।
इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर परियोजना
यह योजना देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है, जहां किसानों की सहमति से बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। कॉरिडोर के दोनों ओर 3 से 5 किलोमीटर तक औद्योगिक जोन बनाए जाएंगे। कुल 1290.74 हेक्टेयर (लगभग 3200 एकड़) भूमि का विकास प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, किसानों को विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा वापस मिलेगा। वे अपनी जमीन पर उद्योग लगा सकते हैं या इसे अन्य उद्योगपतियों को बेच सकते हैं। जो किसान नकद मुआवजा चाहें, वे राज्य की भूमि क्रय नीति के अनुसार भुगतान प्राप्त कर सकेंगे।
परियोजना से लाभान्वित 17 गांव
इस परियोजना से कोडियाबर्डी, नैनोद, रिंजलाय, बिसनावदा, नावदा पंथ, श्रीराम तलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा, नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, टीही और धन्नड़ के किसानों को सीधा लाभ होगा। इन क्षेत्रों के ग्रामीणों की आय में बढ़ोतरी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
एमपीआईडीसी अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को तेज करेगी। निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और निवेशकों के लिए यह क्षेत्र आकर्षक बन जाएगा।
भविष्य की योजनाएं
कॉरिडोर के आसपास आने वाले वर्षों में आधुनिक औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स हब और स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना है। इससे न सिर्फ स्थानीय रोजगार बढ़ेगा बल्कि राज्य के औद्योगिक उत्पादन में भी वृद्धि होगी।
