MP लोकायुक्त संगठन ने बुधवार सुबह इंदौर और ग्वालियर में एक साथ कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के आठ ठिकानों पर छापे मारे। टीम को सर्चिंग के दौरान बेहिसाब संपत्ति और भारी मात्रा में नकदी, सोना-चांदी के जेवर, विदेशी मुद्रा और महंगी गाड़ियों के सबूत मिले हैं।
मिला बड़ा कलेक्शन
सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त की यह कार्रवाई गोपनीय शिकायत के आधार पर की गई। इंदौर में कैलाश कुंज, बिजनेस स्काई पार्क और काउंटी वॉक इलाके के घरों के साथ-साथ ग्वालियर के इंद्रमणि नगर स्थित निवास पर भी तलाशी ली गई। जांच में अब तक डेढ़ किलो सोने की ईंट, एक किलो सोने के आभूषण, चार किलो चांदी के जेवर, 75 लाख रुपए नकद, और लगभग साढ़े चार लाख की विदेशी मुद्रा (5000 यूरो) बरामद हुई है। इसके अलावा दो फ्लैट, एक निर्माणाधीन बंगला, महंगी गाड़ियां और परफ्यूम का बड़ा कलेक्शन भी मिला है।
लोकायुक्त डीएसपी ने दी ये जानकारी
लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान ने बताया कि प्रारंभिक जांच में धर्मेंद्र भदौरिया की वैध आय करीब दो करोड़ रुपए पाई गई है, जबकि आठ करोड़ से ज्यादा के खर्च और निवेश के सबूत मिले हैं। भदौरिया के नाम पर कई बैंक खातों और पांच लॉकर की जानकारी भी सामने आई है। इंदौर के काउंटी वॉक इलाके में 4700 वर्गफुट जमीन पर उनका आलीशान बंगला निर्माणाधीन है।
लेनदेन की जांच जारी
जांच में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है कि भदौरिया के बेटे सूर्यांश भदौरिया फिल्मों में निवेश करते थे। उन्होंने एक प्रोडक्शन कंपनी भी बनाई थी, जिसमें पिता धर्मेंद्र और बहन अपूर्वा ने भी पैसे लगाए थे। लोकायुक्त टीम अब इस फिल्मी निवेश के स्रोत और लेनदेन की जांच कर रही है।
बैकग्राउंड
धर्मेंद्र भदौरिया 1987 में आबकारी विभाग में भर्ती हुए थे और अगस्त 2025 में सेवानिवृत्त हुए। उल्लेखनीय है कि 2020 में उन्हें शराब ठेका नीलामी में लापरवाही के आरोप में निलंबित भी किया गया था। अब रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद उनके खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त की टीम ने कहा है कि दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच के बाद भ्रष्टाचार का पूरा नेटवर्क सामने आने की संभावना है।
