NEET PG काउंसलिंग 2026 के तहत NRI कोटे की सीटों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (DME) द्वारा चौथे मॉप-अप राउंड में बची हुई NRI सीटों को जनरल कोटे में परिवर्तित करने के फैसले को चुनौती दी गई। इस मामले में NRI अभ्यर्थियों ने Madhya Pradesh High Court में रिट याचिका दायर की, जिस पर सोमवार को इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता डॉ. अभि शर्मा की ओर से अधिवक्ता हेमेंद्र जैन ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा नियमों के अनुसार NRI अभ्यर्थी प्रथम, द्वितीय और मॉप-अप राउंड तक NRI कोटे में प्रवेश के पात्र होते हैं। इसके बावजूद चौथे मॉप-अप राउंड में शेष सीटों को जनरल कोटे में बदल दिया गया, जिससे पात्र छात्रों के अधिकार प्रभावित हुए।
अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने तर्क दिया कि जब तक पात्र NRI अभ्यर्थी उपलब्ध हैं, तब तक सीटों को अन्य कोटे में परिवर्तित करना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन भी बताया।
NEET PG 2026
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने छात्रों के पक्ष में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया। कोर्ट ने DME को निर्देश दिए कि मध्य प्रदेश पीजी एडमिशन नियमों के अनुसार पात्र NRI अभ्यर्थियों को अंतिम राउंड तक अवसर दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब योग्य उम्मीदवार मौजूद हों, तब सीटों को दूसरे कोटे में स्थानांतरित करना न्यायसंगत नहीं है।
पारदर्शिता पर जोर
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। इससे यह संदेश गया है कि प्रवेश प्रक्रिया में नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए। छात्रों और अभिभावकों ने भी मांग की है कि DME अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए अंतिम राउंड तक NRI कोटे की सीटें सुरक्षित रखे।
काउंसलिंग प्रक्रिया पर असर
इस फैसले के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया पर नजरें टिकी हैं। यदि अंतिम राउंड में पात्र NRI अभ्यर्थी सामने आते हैं, तो उन्हें NRI कोटे में ही प्रवेश दिया जाएगा। माना जा रहा है कि यह आदेश भविष्य की काउंसलिंग प्रक्रियाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
