इंदौर में रविवार को अभियोजन अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षता संवर्धन के उद्देश्य से एक दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यक्रम लोक अभियोजन मध्यप्रदेश के तत्वावधान और संचालक लोक अभियोजन मध्य प्रदेश के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। विभिन्न न्यायालयों में शासन की ओर से पैरवी करने वाले अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने किया। विशेष अतिथि के रूप में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (नगरीय) आरके सिंह उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संचालक लोक अभियोजन बीएल प्रजापति ने की। दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यशाला की शुरुआत हुई। उद्घाटन सत्र में सहायक निदेशक अभियोजन आरएस भदौरिया ने स्वागत भाषण दिया।
इंदौर में अभियोजन
अध्यक्षीय उद्बोधन में बीएल प्रजापति ने नए आपराधिक कानून 2023 के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलते विधिक परिवेश में अभियोजन अधिकारियों का निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक है। मुख्य वक्ता न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों में अभियोजन की भूमिका पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने प्रभावी पैरवी, साक्ष्यों की प्रस्तुति और पीड़ित को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर अपने अनुभव साझा किए।
तनाव प्रबंधन पर सत्र
कार्यशाला में अमित सिंह सिसोदिया और चिराग अरोड़ा ने नए आपराधिक कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के संग्रहण और न्यायालय में उसकी प्रस्तुति पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इसके अतिरिक्त साइकोलॉजिस्ट ईशा देशपांडे ने पैरवी के दौरान उत्पन्न मानसिक दबाव और तनाव से निपटने के उपाय बताए। कार्यक्रम की शुरुआत योगाचार्य डॉ. दक्षदेव गौड द्वारा योग एवं ध्यान सत्र से हुई, जिससे प्रतिभागियों को सकारात्मक ऊर्जा मिली।
प्रमाण-पत्र वितरण के साथ समापन
समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का नेतृत्व उपनिदेशक अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया ने किया। अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी आरती भदौरिया ने आभार व्यक्त किया, जबकि संचालन ज्योति आर्य ने किया। सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अभिषेक जैन ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम अभियोजन की गुणवत्ता और कार्यकुशलता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
