MP हाईकोर्ट में लोकायुक्त से जुड़े रिश्वत मामले की मूल केस डायरी गुम होने के मामले को लेकर याचिका दायर की गई। याचिका में बताया गया कि लोकायुक्त ने ट्रायल कोर्ट में लंबित मामले की मूल फाइल खो देने की बात कही और उसकी जगह सत्यापित कॉपी पेश की। ट्रायल कोर्ट ने इसे स्वीकार कर सुनवाई जारी रखी, जिसे आवेदक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए नाराजगी जताई। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त), भोपाल को निर्देश दिए कि दोषी विवेचना अधिकारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। इसके अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए तीन दिन के भीतर लोकायुक्त रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष रिपोर्ट पेश करने को कहा गया।
MP हाईकोर्ट
मामला अगस्त 2019 का है, जब जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने लोक निर्माण विभाग के हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक को 3 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। यह रिश्वत जीपीएफ राशि जारी करने के लिए मांगी गई थी। 2021 में मामला ट्रायल कोर्ट में पहुँचा, जहां लगातार सुनवाई के बाद 17 अक्टूबर 2023 को ट्रायल कोर्ट ने लोकायुक्त को निर्देश दिए कि आरोपी की आवाज से संबंधित नमूने और दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश किए जाएं।
लोकायुक्त ने पेश की सत्यापित कॉपी
लोकायुक्त ने इस निर्देश के जवाब में कहा कि मूल फाइल संभवतः गुम हो गई है और केवल सत्यापित कॉपी पेश की। ट्रायल कोर्ट ने इसे स्वीकार कर सुनवाई शुरू कर दी, लेकिन आरोपी अनिल कुमार ने हाईकोर्ट में सवाल उठाया कि मूल फाइल आखिर कैसे गुम हो सकती है।
जनवरी 2026 में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील जसनीत सिंह होरा ने बताया कि सरकारी फाइलें सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं और उनका गुम होना गंभीर लापरवाही है। लोकायुक्त एसपी अंजुलता पटले ने कोर्ट में बताया कि विवेचना अधिकारी डीएसपी ऑस्कर किंडो, जो अब रिटायर्ड हैं, की गलती से फाइल गुम हुई।
तुरंत कार्रवाई के निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिए कि दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। तीन दिन के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से रिपोर्ट पेश करनी होगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट में चल रहे भ्रष्टाचार के मूल मामले पर सुनवाई जारी रहेगी। अधिवक्ता जसनीत सिंह होरा ने कहा कि हाईकोर्ट का यह आदेश सरकारी विभागों के लिए नजीर होगा। इससे मूल दस्तावेजों में लापरवाही या छेड़छाड़ करने वाले अधिकारियों पर अंकुश लगेगा और भविष्य में ऐसा पुनः नहीं होगा।
