MP हाईकोर्ट ने बुधवार को नीट पीजी प्रवेश से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि यदि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की सीटें खाली हों और इसके लिए योग्य आवेदन प्राप्त हुए हों, तो अगली सुनवाई से पहले उनका अलॉटमेंट कर दिया जाए। कोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग से दो सप्ताह के भीतर इस मामले में जवाब भी मांगा है।
इस मामले में याचिकाकर्ता डॉ. अभि शर्मा की ओर से केस लड़ रहे एडवोकेट हेमेंद्र जैन ने बताया कि हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रवेश प्रक्रिया में चाहे एक राउंड हो या कई राउंड हों, अंतिम मॉपअप राउंड या स्टे वेकेंसी राउंड में एनआरआई कोटे की खाली सीटें योग्य आवेदकों को अलॉट की जानी चाहिए।
MP: नियमों के आधार पर बहस
जैन ने आगे कहा कि उनकी दलील के अनुसार एमपी मेडिकल एजुकेशन रूल्स 2018-19 के नियम 14 (क) (2) के तहत हर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 15 प्रतिशत सीटें एनआरआई कोटे के लिए आरक्षित होती हैं। यदि एनआरआई छात्र उपलब्ध नहीं होते हैं, तो खाली सीटें जनरल कोटे के छात्रों को नहीं दी जा सकतीं। ऐसे मामलों में लास्ट राउंड तक एनआरआई सीटों का फॉलोअप करना अनिवार्य है।
प्रक्रिया का महत्व
कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान एनआरआई सीटों का सही तरीके से उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इससे न केवल नियमों का पालन होगा, बल्कि योग्य एनआरआई छात्रों को उनके कोटे के अनुसार सीटें मिलने में मदद मिलेगी। हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह अगली सुनवाई तक एनआरआई सीटों की स्थिति और अलॉटमेंट प्रक्रिया की जानकारी कोर्ट में पेश करें। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि नियमानुसार किसी भी खाली सीट का गलत तरीके से जनरल छात्रों को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
छात्रों और कॉलेजों के लिए असर
इस निर्णय से एनआरआई छात्रों को उनके आरक्षित कोटे के तहत समय पर प्रवेश मिलने की संभावना बढ़ गई है। वहीं कॉलेजों को भी नियमों के अनुसार अलॉटमेंट प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश मिला है। इससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित होगा।
