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उज्जैन सेवाधाम आश्रम में डेढ़ माह में 11 बच्चों की मौत, हाईकोर्ट ने अधिकारियों को नोटिस जारी किया

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Published On: 26 February 2026

उज्जैन के अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच 11 बच्चों की मौत हुई है। मृत बच्चों में अधिकांश बहु-दिव्यांग और 10 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के थे। सभी बच्चों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल उज्जैन लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हुई।

सेवाधाम आश्रम में बीते एक साल में कुल 17 बच्चों की मौत की जानकारी मिलने के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया। कोर्ट ने मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास प्रमुख सचिव, आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।

लगातार हुई मौतें

शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर 2025 में 8 बच्चों और जनवरी 2026 में अब तक 2 बच्चों की मौत हुई है। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर ने बताया कि कुछ बच्चों को मृत अवस्था में लाया गया, जबकि कुछ की मौत इलाज के दौरान हुई। अधिकांश मामलों में एनीमिया और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आई हैं।

आश्रम में बच्चों की स्थिति

अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में लगभग 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रहते हैं। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने बताया कि इनमें से 50 से अधिक बच्चों की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं और चलने-फिरने या स्वयं भोजन करने में असमर्थ होते हैं।

करीब 1.5 साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामले के बाद प्रशासन ने वहां की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया। मृतकों में अधिकांश बच्चे इसी समूह से थे।

आश्रम संचालक का बयान

सुधीर भाई गोयल ने बताया कि जिन बच्चों की मौत हुई, वे पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। कई बच्चों को सांस लेने में परेशानी, खून की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों का उपचार पहले से विभिन्न संस्थानों में चल रहा होता है और उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें आश्रम में रखा जाता है।

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