बिहार सरकार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव रविवार तड़के उज्जैन पहुंचे और विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दर्शन किए। अलसुबह मंदिर पहुंचे मंत्री ने विधि-विधान से बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना की और प्रदेश के किसानों की खुशहाली के साथ देश की तरक्की की कामना की। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जहां श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
दर्शन के बाद मंत्री यादव ने कहा कि कृषि ही देश की रीढ़ है और किसान मजबूत होंगे तभी राष्ट्र आगे बढ़ेगा। उन्होंने बाबा महाकाल से यह प्रार्थना की कि देशभर के किसानों को बेहतर उत्पादन, उचित मूल्य और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा मिले। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार सरकार किसानों के हित में लगातार योजनाएं चला रही है, जिनका असर आने वाले वर्षों में साफ दिखाई देगा।
महाकाल के दर पर पहुंचे बिहार के कृषि मंत्री
महाकाल दर्शन से पहले राम कृपाल यादव शनिवार को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में पहुंचे थे। यहां उन्होंने ICARDA में आयोजित दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में देशभर से कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य विषय दलहन उत्पादन बढ़ाकर राज्यों को आत्मनिर्भर बनाना रहा।
बिहार को मिला दलहन उत्पादन के लिए बड़ा सहयोग
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 93.75 करोड़ रुपये का चेक प्रदान किया। इस आर्थिक सहयोग से राज्य में दलहन आधारित खेती को नई गति मिलने की उम्मीद जताई गई। मंत्री यादव ने इसे बिहार के किसानों के लिए अहम कदम बताया और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।
आज उज्जैन के पावन धाम में भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन एवं विधिवत पूजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बाबा महाकाल के चरणों में शीश नवाकर समस्त बिहारवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
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— Ram Kripal Yadav (@ramkripalmp) February 8, 2026
राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस और मिशन का लक्ष्य
कार्यक्रम में बिहार में दलहन पर एक राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने सहमति दी। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में अरहर, चना, मसूर, उड़द और मूंग जैसी फसलों के उत्पादन को बढ़ाकर बिहार को दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।
