उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि का पर्व पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शनिवार को शिवनवरात्रि के दूसरे दिन मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रही। मंदिर प्रांगण स्थित कोटितीर्थ के तट पर सुबह 8 बजे से विशेष धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वातावरण मंत्रोच्चार और भक्ति भाव से सराबोर नजर आया।
शिवनवरात्रि के अवसर पर कोटितीर्थ के तट पर गणेश पूजन के साथ कोटेश्वर महादेव का विधिवत पूजन, अभिषेक और आरती संपन्न हुई। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच हुए इन अनुष्ठानों ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए कतारों में खड़े नजर आए।
महाकालेश्वर मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों ने भगवान महाकाल का विशेष अभिषेक संपन्न कराया। इस दौरान एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ का पाठ किया गया। वैदिक परंपराओं के अनुसार किए गए इस अभिषेक में जल, दुग्ध और अन्य पवित्र सामग्रियों का उपयोग किया गया, जिससे पूरा गर्भगृह भक्तिमय हो उठा।
दोपहर तीन बजे के बाद संध्या पूजन के पश्चात भगवान महाकाल का नवीन वस्त्रों से भव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला और छत्र से सुसज्जित किया गया। श्रृंगार में भांग, चंदन और सूखे मेवों का विशेष प्रयोग किया गया, जिससे भगवान का स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। नारंगी की माला और मुंड-माला अर्पित कर श्रृंगार को पूर्णता दी गई।
अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन
मंदिर प्रशासन के अनुसार शिवनवरात्रि के दौरान 15 फरवरी तक भगवान महाकाल प्रतिदिन सायंकाल अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। हर दिन का श्रृंगार और पूजन विशेष महत्व रखेगा। इसे देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
त्योहार के दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सेवकों और प्रशासनिक अमले की तैनाती की गई है। श्रद्धालु अनुशासन में रहकर दर्शन कर रहे हैं और शिवनवरात्रि के इस पावन पर्व का आनंद ले रहे हैं।
